भीलवाड़ा में भ्रष्टाचार की इंजीनियरिंग, बिना कार्य किए MB में दर्ज किया, साइड इंजीनियर की यह कैसी मिलीभगत?

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 25 Jun, 2026 06:04 PM

the engineering of corruption in bhilwara

भीलवाड़ा। जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा हाल ही किए गए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता पाई जा रही है। इन निर्माण कार्यों में जिम्मेदार इंजीनियरों द्वारा बिना निर्माण किए एमबी भरने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

भीलवाड़ा। जिले में जल संसाधन विभाग द्वारा हाल ही किए गए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता पाई जा रही है। इन निर्माण कार्यों में जिम्मेदार इंजीनियरों द्वारा बिना निर्माण किए एमबी भरने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले के बनेड़ा क्षेत्र में ग्राम निम्बाहेड़ा खुर्द में पिछले वर्ष हुए निर्माण कार्य में भयंकर अनियमितता पाई गई। इस निर्माण में बिना कार्य किए ही  मेजरमेंट पुस्तिका में नाप दर्ज  कर लिया जिससे संवेदक अब पूरे भुगतान का हकदार माना जाएगा।  दरअसल सरकारी महकमा अब कमीशनखोरी के जाल में इस कदर फंस गया है कि अब इन इंजीनियरों को बिना कमीशन के शायद नींद तक नहीं आती होगी। 

गौरतलब है कि यह खेल पूरे जिले में किया जा रहा है हाल ही में मेजा डेम कैनाल में भी इसी प्रकार की अनियमितता पाई गई थी। ठेकेदार व इंजीनियर की मिलीभगत से घटिया निर्माण किया गया जिसे अखबारों की सुर्खियों के चलते उक्त घटिया निर्माण को तुड़वा कर फिर से करवाया गया। लेकिन अब देखना यह है कि क्या आला अधिकारी इस निर्माण कार्य में क्या एक्शन लेते है या मिलीभगत का यह खेल यूं ही खुलेआम फलता फूलता रहेगा। 

बिना निर्माण किए माप पुस्तिका (Measurement Book - MB) 
इस प्रकार से बिना निर्माण किए एमबी भर देना और सरकारी धन का गबन करना इंजीनियरिंग और प्रशासनिक तंत्र के चरम भ्रष्टाचार को दर्शाता है। इसे तकनीकी और प्रशासनिक भाषा में "कागजी निर्माण" या "घोस्ट वर्क" (Ghost Work) कहा जाता है, जहां जमीन पर कोई काम नहीं होता लेकिन कागजों में उसे पूरी तरह पूरा दिखा दिया जाता है।यह मिलीभगत कई स्तरों पर काम करती है। 

मिलीभगत का यह खेल कैसे काम करता है?
ठेकेदार और JE का गठजोड़:

सबसे पहले जूनियर इंजीनियर (JE) जमीनी स्तर पर बिना किसी काम के या अधूरे काम को ही पूरा दिखाकर MB में झूठी एंट्री दर्ज की गई है । लेकिन इसमें बड़ा सवाल है कि आखिर क्यों एक जूनियर इंजीनियर की यह हिम्मत हो जाती है। इसमें उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

सीनियर अधिकारियों की मूक सहमति: 
सहायक अभियंता (AEN) और अधिशासी अभियंता (exn) बिना भौतिक सत्यापन किए या आंखें मूंदकर उस MB को प्रमाणित (Verify) कर देते हैं। फर्जी बिलिंग और भुगतान: MB पास होने के बाद लेखा विभाग (Accounts) से बिना किसी रोक-टोक के भुगतान राशि  ठेकेदार के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। 

कमीशन का बंदरबांट
इस पूरी प्रक्रिया के बदले ठेकेदार से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों में एक निश्चित प्रतिशत (कमीशन) एडवांस या काम के नाम पर बांट दिया जाता है। यह भ्रष्टाचार जनता और देश को नासूर की तरह से नौच रहा है। 

राजस्व की खुली लूट: 
जनता के टैक्स का पैसा बिना किसी सार्वजनिक लाभ के सीधे भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों की जेब में चला जाता है। सुरक्षा से खिलवाड़  जब कागजों पर बनी फाइलें असलियत में अधूरी या घटिया होती हैं, तो पुलों का गिरना, सड़कों का उखड़ना और इमारतों का ढहना जैसी दुर्घटनाएं होती हैं।
 
जियो-टैगिंग का बनाया मखौल
हर निर्माण कार्य के अलग-अलग चरणों की  जीपीएस-लोकेशन आधारित तस्वीरें MB के साथ लिंक की जाती है। बावजूद उसके इन अधिकारियों ने जमीन में दबे निर्माण कार्य को धत्ता बता किया जा रहा है। जमीन के अंदर किए गए कार्यों का हवाला देकर यह अधिकारी शिकायत कर्ता पर भी रोब झाड़ते है। 

थर्ड पार्टी ऑडिट 
वर्तमान हालातों को देखते हुए तो भीलवाड़ा जिला जल संसाधन विभाग में पिछले कुछ वर्षों के निर्माण कार्यों की (थर्ड पार्टी) बाहर की किसी स्वतंत्र एजेंसी से औचक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए ताकि दूध का दूध हो सके आमजन की गाढ़ी कमाई को चपत लगाने वाले अधिकारियों व ठेकेदारों पर नकेल कसी जा सके। 

इनका कहना है।
इसमें विभाग कार्यवाही करेगा सारा कार्य जमीन के अंदर किया गया है - मुकेश ( AEN)
Exn छोटूराम कोली ने कार्यवाही की बात कही लेकिन क्या कार्यवाही की है यह नहीं बता रहे है

 

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