Edited By Anil Jangid, Updated: 06 Mar, 2026 05:18 PM

करौली। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले को राजस्थान के करौली से सीधे जोड़ने वाला चंबल नदी पर सेवरघाट पुल अब तैयार हो चुका है। इस पुल के निर्माण से मुरैना के जौरा-कैलारस से करौली की दूरी 160 किलोमीटर से घटकर केवल 80 किलोमीटर रह जाएगी।
करौली। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले को राजस्थान के करौली से सीधे जोड़ने वाला चंबल नदी पर सेवरघाट पुल अब तैयार हो चुका है। इस पुल के निर्माण से मुरैना के जौरा-कैलारस से करौली की दूरी 160 किलोमीटर से घटकर केवल 80 किलोमीटर रह जाएगी।
नवरात्र और अन्य त्योहारों के समय बड़ी संख्या में लोग मध्य प्रदेश के इस क्षेत्र से करौली स्थित कैलादेवी मंदिर के दर्शन के लिए जाते हैं। इस पुल से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा होगी, बल्कि पत्थर कारोबारियों और स्थानीय व्यापारियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान सरकार ने इस पुल के निर्माण के लिए साल 2020 में मंजूरी दी थी। 720 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा यह पुल 13 पिलरों पर खड़ा है। निर्माण कार्य लगभग पांच महीने पहले पूरा हो चुका है, लेकिन फिलहाल पुल से आवागमन शुरू नहीं हो सका है।
अभी तक जौरा से करौली जाने के लिए लोग मुरैना, धौलपुर, बाड़ी और सरमथुरा होते हुए लगभग 160 किलोमीटर की दूरी तय करते थे। कैलारस के कई गांवों के लोग चंबल नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेते थे।
सेवरघाट पुल के प्रभारी संतोष वर्मा ने बताया कि राजस्थान क्षेत्र में अभी सिर्फ एप्रोच रोड का कुछ निर्माण बाकी है। जैसे ही यह कार्य पूरा होगा, पुल से आवागमन तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। उनका अनुमान है कि एक महीने के भीतर पुल पूरी तरह से आम जनता के लिए खुल जाएगा।
यह पुल क्षेत्र के लोगों के लिए लंबी दूरी की यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के साथ-साथ दोनों राज्यों के व्यापार और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पुल के खुलने से इलाके के विकास में नई गति आएगी और मुरैना-करौली के बीच यात्रा अब आधी दूरी में पूरी होगी।