राजस्थान में फरार अपराधियों का बढ़ता संकट: अलवर में सबसे अधिक 984 आरोपी अब भी फरार

Edited By Anil Jangid, Updated: 17 Jun, 2026 03:13 PM

rising concern of absconding criminals in rajasthan

अलवर: राजस्थान में फरार और वांछित अपराधियों की बढ़ती संख्या पुलिस प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार अलवर जिला इस मामले में पूरे प्रदेश में सबसे आगे है, जहां 984 आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

अलवर: राजस्थान में फरार और वांछित अपराधियों की बढ़ती संख्या पुलिस प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार अलवर जिला इस मामले में पूरे प्रदेश में सबसे आगे है, जहां 984 आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इन अपराधियों में हत्या, लूट, डकैती, अवैध हथियार, गो-तस्करी और संगठित अपराध से जुड़े कई नाम शामिल हैं, जो लंबे समय से फरार चल रहे हैं।

 

प्रदेश स्तर पर जनवरी से अप्रैल के बीच कुल 12,408 भगोड़े अपराधी रिकॉर्ड में दर्ज किए गए थे। इनमें से पुलिस ने 683 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि 239 मामलों को खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद 11,486 आरोपी अब भी फरार हैं, जो कानून व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। पुलिस ने इन वांछित अपराधियों पर उनकी गंभीरता के अनुसार 1,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का इनाम घोषित किया है।

 

पुलिस विभाग द्वारा इन अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए 2025 से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत थानों की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और संदिग्ध ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, कई बार अपराधियों को पुलिस की कार्रवाई की पूर्व सूचना मिल जाती है, जिससे वे समय रहते फरार होने में सफल हो जाते हैं।

 

जोन स्तर पर जयपुर रेंज इस मामले में सबसे आगे है, जहां 2,647 फरार अपराधी दर्ज हैं। इसके बाद जयपुर कमिश्नरेट में 2,176 और भरतपुर रेंज में 1,408 अपराधी अब भी पकड़ से बाहर हैं। जिलों की सूची में अलवर 984 मामलों के साथ शीर्ष पर है, जबकि जयपुर पश्चिम में 769, डीग में 630, जयपुर पूर्व में 627 और उदयपुर में 533 फरार आरोपी दर्ज हैं।

 

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि किसी हिस्ट्रीशीटर या वांछित अपराधी द्वारा कोई नई वारदात की जाती है, तो केवल संबंधित थाना प्रभारी ही नहीं बल्कि उस जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) भी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। इस निर्देश का उद्देश्य जवाबदेही तय करना और पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

 

इसके अलावा, पांच साल से अधिक पुराने और अनसुलझे हत्या मामलों को जल्द निपटाने के भी निर्देश दिए गए हैं। डीजीपी ने कहा कि इन मामलों की जांच रेंज आईजी और एसपी की सीधी निगरानी में होनी चाहिए। जिले में कुल 207 हिस्ट्रीशीटर दर्ज हैं, जिनमें से शहरी क्षेत्र में 85 सबसे अधिक हैं। कोतवाली थाना क्षेत्र और अरावली थाना क्षेत्र में भी हिस्ट्रीशीटरों की संख्या उल्लेखनीय रूप से अधिक पाई गई है।

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