श्रीगंगानगर में AQI 249, देश का सबसे प्रदूषित शहर: राजस्थान बना प्रदूषण हॉटस्पॉट

Edited By Anil Jangid, Updated: 06 Apr, 2026 03:30 PM

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श्रीगंगानगर: राजस्थान में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है और अब श्रीगंगानगर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है। 5 अप्रैल 2026 को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 249 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले 4...

श्रीगंगानगर: राजस्थान में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है और अब श्रीगंगानगर देश का सबसे प्रदूषित शहर बनकर उभरा है। 5 अप्रैल 2026 को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 249 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इससे पहले 4 अप्रैल को यहां AQI 191 था, यानी सिर्फ 24 घंटों में 58 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, श्रीगंगानगर की हवा में ओजोन का स्तर काफी अधिक हो गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। वायु में घुले प्रदूषक तत्व लोगों में सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से करीब 300 प्रतिशत अधिक पहुंच गया है।

 

वहीं दूसरी ओर पंपोर देश का सबसे स्वच्छ शहर रहा, जहां AQI मात्र 16 दर्ज किया गया। इस तुलना से साफ है कि श्रीगंगानगर की हवा पंपोर के मुकाबले लगभग 15 गुना अधिक प्रदूषित है।

 

राजस्थान के अन्य शहरों की बात करें तो टोंक में एक दिन पहले AQI 268 दर्ज किया गया था, जो अब घटकर 187 पर आ गया है। यानी यहां 24 घंटों में 81 अंकों का सुधार देखा गया है।

 

देश की राजधानी दिल्ली में भी प्रदूषण के स्तर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। यहां AQI 137 से घटकर 134 पर पहुंच गया है, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि यह सुधार मामूली है, लेकिन लगातार प्रयासों का असर माना जा रहा है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम, औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

 

यह हालात साफ संकेत देते हैं कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार और आम जनता दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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