आदिवासी समाज का सामाजिक सुधार अभियान: दहेज, डीजे और फिजूलखर्ची पर रोक, शिक्षा व संस्कृति पर जोर

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 30 Oct, 2025 07:48 PM

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दक्षिण राजस्थान की सियासत में जहां राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आदिवासी युवाओं को भटकाने और संस्कृति को कमजोर करने का आरोप लगाती रहती हैं, वहीं अब आदिवासी समाज ने खुद आगे बढ़कर सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।

बांसवाड़ा/सज्जनगढ़। दक्षिण राजस्थान की सियासत में जहां राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आदिवासी युवाओं को भटकाने और संस्कृति को कमजोर करने का आरोप लगाती रहती हैं, वहीं अब आदिवासी समाज ने खुद आगे बढ़कर सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है।

बांसवाड़ा में आयोजित समाज की एक बड़ी बैठक में सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने और शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने के संकल्प लिए गए। समाजजनों ने निर्णय लिया कि अब विवाह, संस्कार और अन्य आयोजनों में फिजूलखर्ची, दहेज और डीजे संस्कृति पर पूरी तरह से रोक रहेगी।

 बांसवाड़ा बैठक के प्रमुख निर्णय

 सज्जनगढ़ के कारमी गांव में भी ऐतिहासिक फैसला

इसी तरह ग्राम पंचायत मस्का बड़ा के कारमी गांव में बुधवार को हुई बैठक में भी समाज सुधार के लिए कड़े और प्रेरक निर्णय लिए गए।

  • विवाह में लड़की की ओर से केवल 1 किलो 500 ग्राम बांदी का ही उपयोग होगा।

  • सोने में सिर्फ एक नाक की बाली दी जाएगी।

  • दहेज की अधिकतम राशि 50,000 रुपये तय की गई।

  • कन्यादान की राशि 11,000 रुपये से अधिक नहीं दी जाएगी।

  • डीजे और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध।

  • नियमों के उल्लंघन पर 51,000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।

इन निर्णयों को पूरे क्षेत्र में आदिवासी संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में प्रेरक कदम बताया जा रहा है।

 सामाजिक परिवर्तन की नई मिसाल

इन बैठकों के निर्णयों को लेकर स्थानीय समाज में उत्साह है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह अभियान न केवल फिजूलखर्ची और कुरीतियों को खत्म करेगा, बल्कि आदिवासी समाज को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने की दिशा में ठोस पहल है।

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