Edited By Ishika Jain, Updated: 27 Mar, 2026 06:43 PM

नई दिल्ली में संसद के शून्यकाल के दौरान राहुल कस्वां ने किसानों से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए।
नई दिल्ली में संसद के शून्यकाल के दौरान राहुल कस्वां ने किसानों से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए।
खरीद के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
सांसद कस्वां ने कहा कि MSP पर खरीद को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति अलग है। उनके अनुसार, राजस्थान में रबी और खरीफ फसलों की खरीद पर लगभग 25% की सीमा तय है, लेकिन उस सीमा तक भी खरीद नहीं हो पा रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में करीब 18% और 2024 में केवल 11% फसल की ही खरीद हुई।
खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद प्रक्रिया में हर साल कई तरह की गड़बड़ियां सामने आती हैं। पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) प्रक्रिया सीमित समय के लिए खुलती है, जिससे कई किसान इससे वंचित रह जाते हैं। वहीं, जिन किसानों का पंजीकरण हो जाता है, उनसे भी तुलाई के नाम पर अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतें आती हैं।
FPOs को नहीं मिल रही प्राथमिकता
सांसद ने यह भी कहा कि सरकार ने किसान उत्पादक संगठन (FPOs) तो बनाए हैं, लेकिन उन्हें MSP खरीद प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा रहा। इससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा दोनों प्रभावित होती हैं।
प्रणाली में सुधार की मांग
राहुल कस्वां ने सरकार से मांग की कि MSP खरीद व्यवस्था में बदलाव किया जाए, प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और FPOs को इसमें प्राथमिकता दी जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया।