Edited By Anil Jangid, Updated: 16 Jul, 2026 05:00 PM

टोंक: राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाओं में शामिल बीसलपुर बांध में पानी की घटती आवक ने प्रदेश के कई जिलों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार मानसून की कमजोर स्थिति के कारण बांध का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है।
टोंक: राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजनाओं में शामिल बीसलपुर बांध में पानी की घटती आवक ने प्रदेश के कई जिलों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार मानसून की कमजोर स्थिति के कारण बांध का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बारिश के बाद बीसलपुर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा का दौर थम गया, जिससे बांध में पानी की आवक लगभग बंद हो गई है।
बुधवार सुबह बीसलपुर बांध का जलस्तर घटकर 313.68 आरएल मीटर दर्ज किया गया। पिछले पांच दिनों में बांध का जलस्तर करीब 2 सेंटीमीटर तक कम हुआ है। वहीं, बांध से लगातार हो रही पेयजल निकासी और तेज गर्मी के कारण बढ़ रहे वाष्पीकरण ने जलस्तर पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस साल बीसलपुर बांध का जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम चल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 14 जुलाई 2025 को बांध का जलस्तर 314.07 आरएल मीटर था और जल भंडारण क्षमता में करीब 28.771 टीएमसी पानी मौजूद था। जबकि इस वर्ष 10 जुलाई को जल भंडार केवल 26.286 टीएमसी दर्ज किया गया। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार करीब 2.49 टीएमसी पानी की कमी दर्ज की गई है।
मानसून सक्रिय होने के बाद 3 जुलाई को बीसलपुर बांध में करीब 25.320 टीएमसी पानी था। इसके बाद बारिश के चलते 10 जुलाई तक जल भंडार बढ़कर 26.286 टीएमसी पहुंचा। यानी एक सप्ताह के दौरान केवल 0.966 टीएमसी पानी की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद जलग्रहण क्षेत्र में बारिश कमजोर पड़ने से बांध में नई आवक लगभग रुक गई और जलस्तर में फिर गिरावट शुरू हो गई।
बीसलपुर बांध राजस्थान के कई प्रमुख शहरों की पेयजल जरूरतों को पूरा करता है। यहां से जयपुर, अजमेर, टोंक और ब्यावर सहित कई क्षेत्रों में रोजाना पानी की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में बांध में पानी की कमी का असर आने वाले समय में इन शहरों की जल व्यवस्था पर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की सक्रियता और अच्छी बारिश ही बांध के जलस्तर में सुधार ला सकती है। फिलहाल जलग्रहण क्षेत्र में पर्याप्त बारिश नहीं होने से प्रशासन और जल विभाग की चिंता बढ़ गई है।
दूसरी ओर, उमस और गर्मी बढ़ने के कारण वाष्पीकरण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। इससे बांध से निकलने वाले पानी और नई आवक के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो बीसलपुर बांध पर निर्भर शहरों में जल प्रबंधन की चुनौती और बढ़ सकती है।
प्रशासन की नजर अब मानसून की आगामी गतिविधियों पर टिकी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल बीसलपुर बांध का गिरता जलस्तर राजस्थान के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।