PM मोदी ने किया बाड़मेर रेलवे स्टेशन का लोकार्पण, 127 साल पुराने स्टेशन ने देखा युद्ध, इतिहास और विकास का सफर

Edited By Anil Jangid, Updated: 17 Jul, 2026 06:16 PM

pm modi inaugurates redeveloped barmer railway station

बाड़मेर: राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर का ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन अब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अमृत भारत स्टेशन योजना का हिस्सा बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से नवनिर्मित बाड़मेर रेलवे स्टेशन का लोकार्पण...

बाड़मेर: राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर का ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन अब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित अमृत भारत स्टेशन योजना का हिस्सा बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से नवनिर्मित बाड़मेर रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, बायतु विधायक आदूराम मेघवाल तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

 

करीब 127 वर्ष पुराने इस रेलवे स्टेशन का इतिहास देश की आजादी, भारत-पाक संबंधों और युद्धों का साक्षी रहा है। वर्ष 1899 में स्थापित इस स्टेशन ने समय के साथ कई बड़े बदलाव देखे हैं। कभी टीन की छत वाले छोटे स्टेशन के रूप में शुरुआत करने वाला यह रेलवे स्टेशन आज आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस आकर्षक स्टेशन बन चुका है।

 

ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, तत्कालीन जोधपुर रियासत के महाराजा सरदार सिंह के सुझाव पर सादड़ी, पाली, बालोतरा और बाड़मेर को जोड़ने वाली रेल लाइन का निर्माण 15 मई 1899 को पूरा हुआ था। इसके बाद 22 दिसंबर 1900 को बाड़मेर से कराची तक लगभग 74 मील लंबी रेल लाइन बिछाई गई। आजादी से पहले यह मार्ग भारत और तत्कालीन अविभाजित क्षेत्र के बीच महत्वपूर्ण संपर्क का माध्यम था। वर्ष 1965 तक इस मार्ग पर कराची के लिए रेल सेवा संचालित होती रही।

 

बाड़मेर रेलवे स्टेशन ने वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध का कठिन दौर भी देखा। 8 और 9 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने स्टेशन परिसर के आसपास बमबारी की थी। उस समय स्टेशन के निकट डीजल के बड़े भंडार मौजूद थे। समय रहते उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया और रेलवे स्टेशन को गंभीर नुकसान से बचाया जा सका।

 

ब्रिटिश काल में स्टेशन की इमारत विशेष गोलाकार छतों वाली वास्तुकला में बनाई गई थी। उस समय इस तरह की छतें गर्मी और बारिश से बेहतर सुरक्षा देने के लिए तैयार की जाती थीं। कई वर्षों तक यही भवन यात्रियों की सेवा करता रहा और बाड़मेर रेलवे स्टेशन की पहचान बना रहा।

 

वर्ष 2005-06 में स्टेशन के विकास का नया दौर शुरू हुआ, जब जोधपुर से मुनाबाव तक मीटर गेज लाइन को ब्रॉड गेज में परिवर्तित किया गया। इस परियोजना में तत्कालीन रक्षा मंत्री जसवंत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके बाद बाड़मेर से मालाणी एक्सप्रेस की शुरुआत हुई और स्टेशन पर आधुनिक रेल सुविधाओं का विस्तार किया गया।

 

फरवरी 2006 में भारत और पाकिस्तान के बीच थार एक्सप्रेस सेवा शुरू होने के बाद बाड़मेर और मुनाबाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। इस रेल सेवा ने दोनों देशों के बीच लोगों के आवागमन और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा दी।

 

अब अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बाड़मेर रेलवे स्टेशन का व्यापक पुनर्विकास किया गया है। आधुनिक प्रतीक्षालय, बेहतर यात्री सुविधाएं, आकर्षक भवन, सुगम प्रवेश मार्ग और उन्नत आधारभूत ढांचा इसे पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल करता है। नया स्टेशन न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देगा, बल्कि बाड़मेर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास का प्रतीक भी बनकर उभरा है।

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