जोधपुर के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर की लापरवाही: बाएं की जगह दाएं पैर का ऑपरेशन

Edited By Anil Jangid, Updated: 08 May, 2026 03:42 PM

negligence at jodhpur government hospital right leg operated instead of left

जोधपुर: जोधपुर के सरकारी अस्पताल में एक गंभीर मेडिकल लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसमें एक वृद्ध महिला के पैरों के ऑपरेशन को लेकर गलतफहमी फैल गई। 66 वर्षीय चंपादेवी मारपीट में घायल होने के बाद 22 अप्रैल को मथुरादास माथुर अस्पताल (एमडीएमएच) में...

जोधपुर: जोधपुर के सरकारी अस्पताल में एक गंभीर मेडिकल लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसमें एक वृद्ध महिला के पैरों के ऑपरेशन को लेकर गलतफहमी फैल गई। 66 वर्षीय चंपादेवी मारपीट में घायल होने के बाद 22 अप्रैल को मथुरादास माथुर अस्पताल (एमडीएमएच) में भर्ती हुई थीं। महिला के दोनों पैरों में फैक्चर था, और डॉक्टरों को पहले बाएं पैर और फिर दाएं पैर का ऑपरेशन करना था।

 

हालांकि, डॉक्टर ने पहले दाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया। इस बीच, महिला के परिजनों को केवल बाएं पैर के ऑपरेशन की जानकारी दी गई थी। इसी वजह से अफवाह फैल गई कि गलत पैर का ऑपरेशन किया गया। अगले दिन बाएं पैर का ऑपरेशन किया गया और 30 अप्रैल को महिला को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

 

मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने जांच कमेटी बनाई। जांच में सामने आया कि यह घटना स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन न करने के कारण हुई। जांच कमेटी ने ऑर्थोपेडिक विभाग के यूनिट प्रभारी डॉ. रामकिशन चौधरी, ट्रोमा ओटी में मौजूद रेजिडेंट डॉक्टरों डॉ. महेंद्र कुमार खोरवाल, डॉ. स्वास्तिक, एसआर डॉ. शांतनु जांगिड़, एनेस्थेसिया विभाग के द्वितीय वर्ष के रेजिडेंट डॉ. कपिल और नर्सिंग अधिकारी राजेंद्र राजपुरोहित को लापरवाही का जिम्मेदार पाया।

 

अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सही तरीके से हुए और किसी भी तरह की शारीरिक हानि नहीं हुई। परिजनों ने भी पुष्टि की कि उन्हें दोनों पैरों के सफल ऑपरेशन का भरोसा है और उन्होंने किसी प्रकार की शिकायत दर्ज नहीं करवाई।

 

वहीं, स्थानीय लोगों और कुछ पड़ोसियों द्वारा अफवाह फैलाने के कारण मामला मीडिया में सुर्खियों में आ गया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि भविष्य में इस तरह की गलतफहमियों से बचने के लिए ऑपरेशन से पहले परिजनों को पूरी जानकारी देने और एसओपी का कड़ाई से पालन करने की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा।

 

इस घटना ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि अस्पतालों में मरीजों और परिजनों को स्पष्ट और समय पर जानकारी देना कितना महत्वपूर्ण है। साथ ही, चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में सावधानी और स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पालन न करना न सिर्फ मरीज की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि अस्पताल की विश्वसनीयता पर भी असर डालता है।

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