Edited By Vishal Suryakant, Updated: 16 Sep, 2026 02:30 PM
यूं तो उन सभी निकायों में तमाम नेताओं की साख दांव पर हैं जहां परिणाम त्रिशंकु वाली स्थिति बनी हुई है लेकिन जोधपुर में तो वाकई अजब खेल चल रहा है. दोस्तों, जोधपुर में एक और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दूसरी ओर केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह...
मारवाड़ में किसकी धमक ?
महापौर से तय होगी राजनीति
- विशाल सूर्यकांत
यूं तो उन सभी निकायों में तमाम नेताओं की साख दांव पर हैं जहां परिणाम त्रिशंकु वाली स्थिति बनी हुई है लेकिन जोधपुर में तो वाकई अजब खेल चल रहा है. दोस्तों, जोधपुर में एक और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और दूसरी ओर केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत...।
दोनों के बीच ये सीधा मुकाबला तो नहीं है लेकिन जनता दोनों का दम-खम ग़ौर से देखेगी ये तय है. जोधपुर में जो स्थिति जनता ने बनाई है वो खासी दिलचस्प है. सौ पार्षदों वाले जोधपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों को ही 44-44 सीटे आई हैं.
ये टाई मैच एक तरफ दोनों ही पार्टियों को हैरान किए हुए हैं, वहीं लोग इसे केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के लिए नाक का सवाल बनाने लगे हैं. क्योंकि इस चुनाव में एक दो नहीं बल्कि 10 निर्दलीय चुनाव जीत कर आए हैं. इन पार्षदों का बैकग्राउंड अगर देखें तो वार्ड 5 से विशाल सांखला ने और वार्ड 19 में दिनेश शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को हराया है.
वहीं वार्ड नंबर 20 से चेतन गहलोत ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराया है. वार्ड 27 में कासम खान चुनाव जीते हैं. वहीं वार्ड 29 में अफसाना बानो महिला,ओबीसी आरक्षित सीट पर चुनाव जीती हं. वार्ड 47 में मोहन चौधरी, वार्ड 48 में दुर्गा मेवाड़ा, वार्ड 69 में लियाकत अली रंगरेज, वार्ड 76 में निर्मला नायक और वार्ड 81 में स्वरूप सिंह चुनाव जीते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि जोधपुर में एक सीट पर आरएलपी की ओर से वार्ड 66 में मोहम्मद इरफान उर्फ राजू भाटी चुनाव जीते हैं. वो निर्दलीय नहीं लेकिन तीसरी पार्टी के रूप में उनका रूख़ देखने लायक होगा. हालांकि निर्दलीयों का अपना निजी फैसला होगा कि वो किस और जाएं लेकिन सांखला,शर्मा,मेवाड़ा,नायक,राजपूत के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम पार्षद निर्दलीय जीते हैं.
लिहाज़ा, जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी यह दिलचस्प है कि कौन कहां जाएगा. तो क्या दस पार्षदों के रूख़ पर मारवाड़ की राजनीति का भविष्य तय होगा ? इसे लेकर मारवाड़ ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान में लोगों में कौतूहल है. आम तौर पर सत्ताधारी पार्टी हो तो निर्दलीय उन्हीं के साथ जाना पसंद करते हैं. लेकिन क्या जोधपुर में भी ये होने वाला है ? अगर हां तो फिर गहलोत जो निर्दलीयों के सहारे पांच साल सरकार चलाने की महारत रखते हैं, वही जादू क्या नगर निगम में नहीं चलेगा ?
अगर कांग्रेस यहां निर्दलीयों को अपने खेमे में ले जाती है तो केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह के लिए सवाल खड़ा होगा कि मारवाड़ में अगर गहलोत के सामने विकल्प बने रहना है तो फिर बोर्ड तो भारतीय जनता पार्टी का बनाना होगा. गजेन्द्र सिंह से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदें बेमानी नहीं हैं. गजेन्द्र सिंह ही वो शख्स हैं जिन्होंनें 2019 के लोकसभा चुनाव में दो लाख 74 हजार से ज्यादा वोटों से अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत को प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में हराया था.
गजेन्द्र सिंह शेखावत और अशोक गहलोत के बीच पिछली कांग्रेस सरकार को गिराने के कथित मामले में फोन टैपिंग का मुद्दा भी बहुत व्यक्तिगत स्तर तक चला गया था. इस मामले की गूंज आज भी सुनाई देती है. इस लिहाज़ से जोधपुर में चाहे जिसका बोर्ड बने, उसके नतीजे में दोनों धुंरधरों की साख जोड़कर ज़रूर देखी जाएगी.
जोधपुर की जनता से दोनों के लिए चुनौती भी कम नहीं छोड़ी. गजेन्द्र सिंह के निवास क्षेत्र के वार्ड में कांग्रेस का प्रत्याशी जीत गया और उधर अशोक गहलोत के वार्ड में भारतीय जनता पार्टी का पार्षद बन गया. जनता ने दोनों को झटका भी दे दिया है तो दोनों के लिए बड़ा मौका भी बनाया है, आने वाले वक्त में मारवाड़ का चेहरा गजेन्द्र सिंह होंगे या गहलोत...? जोधपुर में नगर निगम बोर्ड से आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिहाज से दोनों की साख का ये लिटमस टेस्ट होने जा रहा है.
जोधपुर के इस चुनाव में एक पेंच और फंसा है. जोधपुर के वार्ड 50 के एक बूथ में ईवीएम की खराबी के चलते फिर से वोटिंग होगी और नई तारीख का एलान 17 सितंबर को होगा. वार्ड 50 की खासियत यह है कि ये राजस्थान के कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल की लूणी विधानसभा में हैं. यहां 14 सितंबर को वोटिंग के दौरान बूथ 338 में ईवीएम में डिस्प्ले खराब होने की समस्या सामने आई थी. इस बूथ पर सात सौ से ज्यादा वोट डाले जा चुके थे. लेकिन उसे डिकोड करना संभव नहीं, लिहाजा, नए सिरे से इस बूथ के एक हजार से ज्यादा वोटर्स फिर से मतदान करेंगे.
तब वार्ड 50 के परिणाम सामने आएंगे. लिहाज़ा, 21 सितंबर को मेयर और 22 सितंबर को डिप्टी मेयर के इलेक्शन को लेकर भी जोधपुर में संशय बना हुआ है. दोनों ही दल अपने-अपने खेमे के पार्षदों को बाड़ेबंदी में रखकर निर्दलीयों को साधने की जुगत में लगे हैं. कुल मिलाकर चर्चाओं के लिहाज से पूरे प्रदेश का चुनाव एक तरफ और जोधपुर नगर निगम का चुनाव एक तरफ.
क्योंकि यहां दिग्गजों की साख दांव हैं, मारवाड़ की राजनीति का चेहरा बनने का दांव चल रहा है. लिहाज़ा, दोनों ही पार्टियों ने यहां सारा दमखम लगा दिया है. मारवाड़ की अपनायत भरी संस्कृति में, लोगों ने राजनीतिक मुकाबले में भी ऐसी अपनायत दिखाई है कि सारे नेता और सियासी पंडित चक्करघिन्नी हुए बैठे हैं. आगे-आगे देखिए क्या होता है...