Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Mar, 2026 07:33 PM

पाली: राजस्थान के पाली जिले में एलपीजी गैस की कमी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जहां एक ओर प्रशासन और गैस एजेंसियां पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शहर और आसपास के...
पाली: राजस्थान के पाली जिले में एलपीजी गैस की कमी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जहां एक ओर प्रशासन और गैस एजेंसियां पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शहर और आसपास के इलाकों में गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पाली शहर के विभिन्न एलपीजी पंपों पर ऑटो चालकों और अन्य उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी गैस नहीं मिल रही। खासकर कॉमर्शियल सिलेंडर की भारी कमी ने छोटे व्यवसायियों और ठेला संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई लोगों को मजबूरी में अब कोयले का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसकी कीमत 50 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक हो चुकी है।
शहर के नया गांव रोड पर चूल्हे और सिगड़ी की दुकानों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। ठेला लगाकर भोजन बेचने वाले लोग अब गैस के बजाय सिगड़ी पर खाना बना रहे हैं। इससे न केवल उनका खर्च बढ़ गया है, बल्कि काम भी अधिक कठिन हो गया है।
गैस बुकिंग के नियमों में हुए बदलाव ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। पहले जहां शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग समय सीमा के तहत बुकिंग होती थी, अब सामान्य और उज्ज्वला श्रेणी के अनुसार बुकिंग की जा रही है। एक सिलेंडर वाले उपभोक्ताओं को 25 दिन और दो सिलेंडर वालों को 35 दिन बाद बुकिंग की अनुमति है, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 35 दिन बाद ही बुकिंग संभव है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण उन्हें रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ठेला संचालक नीतू चौहान के अनुसार, पहले एक सिलेंडर 6 से 7 दिन तक चलता था, लेकिन अब गैस नहीं मिलने के कारण उन्हें रोजाना करीब 400 रुपये का कोयला खरीदकर सिगड़ी जलानी पड़ रही है, जिससे उनका मुनाफा काफी घट गया है।
इस स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आम लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।