नागौर विस्फोटक सामग्री मामले में NIA का बड़ा एक्शन, ‘नर्सिंगकर्मी’ वाला राज खुला

Edited By Anil Jangid, Updated: 23 Apr, 2026 05:10 PM

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नागौर: राजस्थान के नागौर जिले में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अब आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

नागौर: राजस्थान के नागौर जिले में भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अब आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस मामले में NIA की टीम ने बुधवार को नागौर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला मजिस्ट्रेट से कानूनी अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की।

 

यह मामला 24 जनवरी 2026 का है, जब थांवला थाना क्षेत्र के हरसौर गांव में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 9,550 किलो अमोनियम नाइट्रेट, 8,750 डेटोनेटर और 18,000 मीटर फ्यूज वायर बरामद किया था। कुल मिलाकर, करीब 10 हजार किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे की स्थिति पैदा कर सकती थी। गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच NIA को सौंप दी गई थी।

 

NIA की जांच में सामने आया कि इस पूरे अवैध नेटवर्क का मास्टरमाइंड सुलेमान खान था, जो हरसौर का निवासी है और उस पर पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। सुलेमान के साथ इस अवैध कारोबार में कई लाइसेंसशुदा मैगजीन संचालक भी शामिल थे, जो अपने पद और लाइसेंस का दुरुपयोग कर रहे थे।

 

इसके अलावा, देवराज मेड़तिया, जो दो साल पहले अपना लाइसेंस सरेंडर कर चुका था, ने नर्सिंगकर्मी का रूप धारण किया और कुचेरा में काम करने लगा। हालांकि, यह केवल एक मुखौटा था, क्योंकि वह पर्दे के पीछे से पूरी सप्लाई चेन को मैनेज कर रहा था। बंसीलाल बंजारा (चित्तौड़गढ़), महेंद्र पाल सिंह और भरत कुमार (नागौर) जैसे अन्य लोग अपने लाइसेंस का दुरुपयोग कर सुलेमान को कम दामों पर अवैध बारूद बेचते थे, जिसे सुलेमान बाद में ऊंचे दामों पर बेचता था।

 

मंगलवार को NIA की एक गोपनीय टीम नागौर पहुंची और बुधवार को दिनभर कलेक्ट्रेट कार्यालय में डटी रही। विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत आरोपियों पर कोर्ट में ट्रायल शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) की अनुमति अनिवार्य होती है। NIA ने अब तक विस्फोटक पदार्थों की प्रकृति, FSL रिपोर्ट और आरोपियों के बयानों के आधार पर पुख्ता सबूत जुटा लिए हैं।

 

जैसे ही जिला मजिस्ट्रेट से आधिकारिक मंजूरी मिलती है, NIA इन चारों आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट पेश करेगी, जिससे इस संवेदनशील मामले की न्यायिक सुनवाई शुरू हो सकेगी।

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