Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Mar, 2026 01:28 PM

जयपुर। हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय में लोक संस्कृति और जनसंचार विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। समापन सत्र में मुख्य अतिथि पंडित दीन दयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के कुलगुरू प्रो. अनिल कुमार राय...
जयपुर। हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय में लोक संस्कृति और जनसंचार विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। समापन सत्र में मुख्य अतिथि पंडित दीन दयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के कुलगुरू प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि जनसंचार के आधुनिक युग में लोक माध्यमों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता।
लोक माध्यम ही कर रहे सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित
इस दौरान प्रो. राय ने कहा कि लोक माध्यम ही हैं जो हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किए हुए है। समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि और राजस्थान सरकार में मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार हीरेन जोशी ने कहा कि छात्रों को औपचारिक ज्ञान के साथ आध्यात्मिक अनुभूतियों का ज्ञान भी जरूरी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हरिदेव जोशी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नंद किशोर पांडेय ने कहा कि लोक के माध्यम से तत्व ज्ञान जनता तक पहुंचा।
विभिन्न विषयों पर 9 सत्र आयोजित किए गए
इस संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम के आरंभ में संगोष्ठी के संयोजक डॉ. मनोज लोढा ने प्रतिवेदन प्रस्तुत कर बताया कि लोक संस्कृति और जनसंचार पर केन्द्रित दो दिन की इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय लोकगीत और जनसंचार माध्यम, लोकनृत्य और दृश्य माध्यमों की भूमिका, लोक संस्कार एवं लोक परंपरा का मीडिया प्रतिनिधित्व, लोकदेवता, लोकविश्वास और आधुनिक संचार, लोकसंस्कृति और डिजिटल मीडिया का अंतर्संबंध और जनसंचार शोध और लोक अध्ययन विषयों पर कुल 9 सत्र आयोजित किए गए। विभिन्न सत्रों में देश भर से आए 22 विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए तथा अनेक विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया।
प्रमुख प्रबुद्धजनों ने व्यक्त किए विचार
संगोष्ठी में स्वदेश समूह के संपादकीय सलाहकार एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. गिरीश उपाध्याय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो ज्ञान प्रकाश मिश्रा, माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल के डॉ. लाल बहादुर ओझा, जयपुर तमाशा के कलाकार डॉ. विशाल भट्ट, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वद्यालय, अजमेर में भारत विद्या अध्ययन संकुल के भूतपूर्व एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. रविंद्र भारती, समकालीन भारतीय कवि और अमूर्त चित्रकार अमित कल्ला, विश्व संवाद केन्द्र फाउण्डेशन की निदेशक डॉ. शुचि चौहान आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी के अंत में संगोष्ठी में उपस्थित अतिथियों के प्रति मीडिया अध्ययन के विभागाध्यक्ष डॉ. रतन सिंह शेखावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शालिनी जोशी ने किया।