Edited By Anil Jangid, Updated: 10 May, 2026 12:07 PM

जयपुर: राज्य के 9 लाख कर्मचारियों और 5 लाख पेंशनर्स की स्वास्थ्य सुरक्षा सेवा के लिए संचालित राज्य सरकार की RGHS योजना में पिछले दो महीनों से निजी अस्पतालों द्वारा डॉक्टरी परामर्श, ओपीडी और अधिकृत फार्मेसी द्वारा दवाइयों की सेवाएं बंद होने की स्थिति...
जयपुर: राज्य के 9 लाख कर्मचारियों और 5 लाख पेंशनर्स की स्वास्थ्य सुरक्षा सेवा के लिए संचालित राज्य सरकार की RGHS योजना में पिछले दो महीनों से निजी अस्पतालों द्वारा डॉक्टरी परामर्श, ओपीडी और अधिकृत फार्मेसी द्वारा दवाइयों की सेवाएं बंद होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत (चंपावत गुट) ने आज शासन सचिवालय में सरकार के साथ बैठक की।
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौर, वित्त सचिव वैभव गैलरिया और स्वास्थ्य एवं वित्त विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। महासंघ के प्रदेश महामंत्री जगेश्वर शर्मा ने बैठक में सरकार के समक्ष 09 लाख कर्मचारियों और 05 लाख पेंशनर्स से जुड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा सेवा की मौजूदा समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की। शर्मा ने कहा कि RGHS योजना में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं और अस्पतालों, डॉक्टरों, फार्मेसियों और कर्मचारियों द्वारा की गई गड़बड़ियों की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
महासंघ ने RGHS को बंद कर स्वास्थ्य सुरक्षा सेवा को निजी बीमा कंपनियों के हाथों में सौंपने के सरकार के संभावित कदम का विरोध किया। महासंघ के संयुक्त मंत्री हरीश प्रजापत और शंभू सिंह राठौड़ ने बताया कि इस तरह की योजना 14 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित में न्यायपूर्ण नहीं होगी। महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ऐसा निर्णय लिया तो उसका सशक्त विरोध किया जाएगा।
महासंघ का यह भी कहना है कि निजी बीमा कंपनियों को RGHS की जिम्मेदारी देना सरकार की मूल भावना और गुड गवर्नेंस के सिद्धांत के खिलाफ होगा और यह सरकार के प्रति सकारात्मक माहौल को भी प्रभावित करेगा। महासंघ ने सरकार से अपील की कि RGHS योजना की वर्तमान समस्याओं का समाधान कर इसे कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित में सुचारू रूप से चलाया जाए।
इस बैठक में कर्मचारियों और पेंशनर्स की स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया गया और सरकार से यह अपेक्षा जताई गई कि RGHS को निजीकरण के बजाय सुधार के माध्यम से मजबूत किया जाए। महासंघ ने साफ किया कि वे कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी निर्णय का विरोध करने में पीछे नहीं हटेंगे।