Edited By Ishika Jain, Updated: 10 Jul, 2026 05:55 PM

डूंगरपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों ने 'काला दिवस' मनाकर प्रदर्शन किया। सरकारी कर्मचारी का दर्जा और 30 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग उठाई।
राजस्थान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं आशा सहयोगिनी यूनियन (सीटू) के देशव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को डूंगरपुर में महिला कर्मचारियों ने 'काला दिवस' मनाते हुए अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहुंचीं और सरकार से लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और आशा सहयोगिनियां स्वास्थ्य, पोषण और महिला-बाल विकास से जुड़ी योजनाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद लंबे समय से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
यूनियन की ओर से सरकार के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा सहयोगिनियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, सभी मानदेय कर्मियों के लिए न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक वेतन तय करने, बकाया मानदेय का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने तथा पेंशन और चिकित्सा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग शामिल रही।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विभिन्न स्तरों पर कई बार ज्ञापन और मांग पत्र सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान महिला कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की।