मरीज के पेट से 21 किलो का ट्यूमर निकालने में एम्स जोधपुर के डॉक्टरों ने दिखाई महारत

Edited By Anil Jangid, Updated: 03 Jun, 2026 03:00 PM

doctors at aiims jodhpur successfully remove 21 kg tumor from patient abdomen

जोधपुर: राजस्थान के चिकित्सा इतिहास में एक अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। AIIMS जोधपुर के सर्जन्स ने 59 वर्षीय मरीज के पेट से 20.8 किलोग्राम वजन और 44 सेंटीमीटर आकार के रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया। यह ऑपरेशन करीब 8 घंटे...

जोधपुर: राजस्थान के चिकित्सा इतिहास में एक अनोखा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। AIIMS जोधपुर के सर्जन्स ने 59 वर्षीय मरीज के पेट से 20.8 किलोग्राम वजन और 44 सेंटीमीटर आकार के रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया। यह ऑपरेशन करीब 8 घंटे 30 मिनट तक चला और इसमें पांच विभागों के डॉक्टरों ने टीम वर्क का बेजोड़ उदाहरण पेश किया।

 

मरीज का वजन लगभग 160 किलोग्राम था और वह पिछले एक साल से पेट में दर्द और भारीपन महसूस कर रहा था। अत्यधिक मोटापे के कारण मरीज और उनके परिजन इसे सामान्य चर्बी समझते रहे। इसके चलते ट्यूमर पेट में धीरे-धीरे बढ़ता रहा और समय रहते पहचान नहीं हो सकी। जब मरीज को एम्स में लाया गया, तो डॉक्टर भी पेट के अंदर के इस विशाल ट्यूमर को देखकर हैरान रह गए।

 

ऑपरेशन के दौरान ट्यूमर पूरी तरह से मरीज की दाहिनी किडनी से चिपका हुआ पाया गया। चूंकि ट्यूमर कैंसरयुक्त था, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती थी। मरीज की जान बचाने के लिए पांच विभागों – जनरल सर्जरी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया – के डॉक्टरों ने मिलकर ऑपरेशन किया और ट्यूमर के साथ दाहिनी किडनी को सुरक्षित बाहर निकाला।

 

एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक प्रो. जी.डी. पुरी ने टीम की इस सफलता को ऐतिहासिक बताया और जनता को चेतावनी दी कि मोटापे से जुड़े मरीज पेट में असामान्य बदलावों को नजरअंदाज न करें। उन्होंने ऐसे छह लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी:

 

पेट में लगातार भारीपन महसूस होना।
बिना किसी डाइटिंग के अचानक वजन का कम होना।
थोड़ी मात्रा में खाना खाने पर भी पेट भर जाना।
पेट या पीठ में लगातार दर्द रहना।
लंबे समय तक कब्ज की समस्या।
पेट को छूने पर गांठ या कड़ापन महसूस होना।

 

यह मामला यह याद दिलाता है कि पेट की चर्बी समझकर किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और सतर्कता ही जीवन बचाने का सबसे बड़ा तरीका है।

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