सिरोही में उबल पड़ा गुस्सा! डीएनटी समाज का जेल भरो आंदोलन, जयपुर महापड़ाव का ऐलान

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 18 May, 2026 07:58 PM

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सिरोही | राष्ट्रीय पशुपालक संघ , डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में सिरोही में आज “जेल भरो आंदोलन" हुआ

सिरोही | राष्ट्रीय पशुपालक संघ , डीएनटी संघर्ष समिति एवं मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त तत्वावधान में सिरोही में आज “जेल भरो आंदोलन" हुआ । यह आंदोलन हर जिले में प्रवेश करेगा और अंत में राजधानी जयपुर में 1 जुलाई को “महापड़ाव" के रूप में परिवर्तित हो जाएगा । आंदोलन की रैली कलेक्टर ऑफिस तक गई । 46 डिग्री तापमान में भी लोगों की रैली लेकर कलेक्टर ऑफिस तक गई । अपना आक्रोश दिखाने के लिए राज्य सरकार का पुतला भी जलाया गया । उसके बाद प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री के नाम से कलेक्टर को ज्ञापन दिया ।

डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने बताया कि इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य डीएनटी समाज की 11 सूत्री मांगों को पूरा करवाना है जिसमें डीएनटी समाज को अलग से 10 प्रतिशत मांग प्रमुख है जिसकी सिफारिश रेनके और ईदाते आयोग ने की है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी आरक्षण उपवर्गीकरण कर डीएनटी को ए वर्ग में रखने की बात कही है । इसके अतिरिक्त डीएनटी समाज को 10% राजनीतिक भागीदारी , आवास पट्टे और जमीन की व्यवस्था , शिक्षा आदि मांगे की गई । राजस्थान में डीएनटी की जनसंख्या 15% है अर्थात 1.23 करोड़ है ।   

उन्होंने सरकार से तीन मांगे रखी :
1. दूसरे दौर की वार्ताएं मुख्यमंत्री स्तर पर हों 
2. इस विषय पर बातचीत हो की हमारी मांगों का क्या समाधान है । 5 दिसंबर को हुई पहले दौर की वार्ताओं में हम अपनी माँगों और समस्याओं के बारे में प्रेजेंटेशन दे चुके हैं ।
3. वार्ता की तिथि और समय तुरंत घोषित की जाए ।

डीएनटी संघर्ष समिति के सह-अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया और कालूराम योगी ने बताया की यह आंदोलन पिछले दो वर्ष से चल रहा है । बालराई (पाली) में महापड़ाव के बाद सरकार से वार्ता हुई और सरकार ने तीन माह का समय मांगा लेकिन पांच महीने गुज़र जाने के बाद भी सरकार वार्ता के लिए वापस नहीं आई । वार्ता के बाद भी सरकार ने डीएनटी पर दमन की नीति अपनाई और डीएनटी के 78 आंदोलनकारियों पर मुकदमे किए और 6 लोगों को 18 दिन जेल में रखा । इसलिए यह निर्णय लिया गया कि पूरा डीएनटी, वंचित ओबीसी, वंचित एसटी और वंचित एससी वर्ग ही जेल में आ जाता है ताकि सरकार अपनी दमनकारी इच्छा को पूरा कर सके ।

मूल ओबीसी महापंचायत के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. आरसी कुमावत कहा इस आंदोलन में अब वंचित ओबीसी, वंचित एससी एवं वंचित एसटी वर्ग भी शामिल हो गया है । सभी वंचित वर्गों की मांग है कि आरक्षण का उपवर्गीकरण होना चाहिए ताकि एक न्यायोचित आरक्षण व्यवस्था की रचना हो जिसमें सभी समाजों की शिक्षा , रोजगार और राजनीति में भागीदारी हो सके और असली लोकतंत्र का निर्माण हो सके । आरक्षण उपवर्गीकरण के बारे में कई ओबीसी आयोगों ने सिफारिश की है । 1992 के इंदिरा स्वहाने केस में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को तीन एबीसी तीन भागों में वर्गीकृत करने का निर्णय दिया । 'ए' वर्ग में अति पिछड़ा वर्ग "डीएनटी समाजों" को रखा गया । 'बी' वर्ग में दस्तकार ग्रुप अर्थात वोकेशनल ग्रुप को रखा गया जिसमें कुम्हार , लुहार , खाती , दर्जी सेन ,सुथार , सुनार आदि जातियां आती है । 

डीएनटी संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक चौहान (बावरिया) ने बताया कि 2026 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वाईवी चंद्रचूड़ की संविधान पीठ द्वारा यह निर्णय दिया गया की एससी में भी आरक्षण का वर्गीकरण होना चाहिए ताकि सभी वर्गों को लाभ मिल सके

राष्ट्रीय पशुपालक संघ के संस्थापक उपाध्यक्ष भीखू राईका और कपूर राईका तथा कोषाध्यक्ष किसनाराम देवासी ने बताया कि वंचित वर्गों ने मिलकर एक "दोस्त प्लस" मॉडल बनाया जिसमें डीएनटी, वंचित ओबीसी , वंचित एससी एवं वंचित एसटी शामिल हैं । प्लस में उन समाजों को आमंत्रित किया गया है जो एक न्यायपूर्ण आरक्षण व्यवस्था का समर्थन करते हैं । इस चार वर्गों के लोग अब आंदोलनरत हैं और उनकी मांग है कि "आरक्षण का उपवर्गीकरण" होना चाहिए तभी उन्हें शिक्षा,रोजगार और राजनीतिक भागीदारी मिलेगी । इस वंचित वर्ग में प्रदेश की लगभग 150 समाज आते हैं ।

जैसलमेर से जयपुर तक आंदोलन से वंचित वर्ग एकजुट होगा और सरकार पर दबाव बढ़ेगा ।
आरपीएस के ज़िलाध्यक्ष शंकर देवासी ने बताया की उन्होंने इस आंदोलन के गांव गांव जाकर संपर्क किया और लोगों को जागरूक किया है । इन लोगों ने पहली बार अपने हक की मांग उठाई है । आंदोलन में भाग लेने वाले अन्य प्रमुख नेता थे आरसी पांचाल, डॉ योगी , शंकर जी जांगिड , मदन कुमावत  बावरी समाज से शंकर बावरी, झालजी देवासी 

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