वन विभाग के दावों के बावजूद नागौर की धरातल पर हरियाली सूखी

Edited By Anil Jangid, Updated: 01 Mar, 2026 04:46 PM

despite forest dept claims ground reality shows nagaur s green cover still spar

नागौर। राजस्थान में हरियाली बढ़ाने के लिए वन विभाग बड़े-बड़े दावे करता रहा है, लेकिन जमीन पर वास्तविकता कुछ और ही कह रही है। विभाग के अनुसार वर्ष 2023-24 में 263.726 लाख और वर्ष 2024-25 में 248.342 लाख पौधे लगाए गए, यानी दो वर्षों में कुल 512.068...

नागौर। राजस्थान में हरियाली बढ़ाने के लिए वन विभाग बड़े-बड़े दावे करता रहा है, लेकिन जमीन पर वास्तविकता कुछ और ही कह रही है। विभाग के अनुसार वर्ष 2023-24 में 263.726 लाख और वर्ष 2024-25 में 248.342 लाख पौधे लगाए गए, यानी दो वर्षों में कुल 512.068 लाख (5 करोड़ से अधिक) पौधों का दावा किया गया। इनमें से 4 करोड़ से अधिक पौधों के जीवित होने की बात भी कही जा रही है।

 

हालांकि आंकड़े यह भी बताते हैं कि हरियाली बढ़ाने में अन्य विभागों और आम जनता की भूमिका कहीं अधिक रही। वर्ष 2023-24 में अन्य विभागों ने 103.500 लाख और आमजन ने 194.462 लाख पौधे लगाए। वहीं 2024-25 में अन्य विभागों ने 411.861 लाख और आमजन ने 62.096 लाख पौधे लगाए। कुल मिलाकर दो वर्षों में अन्य विभाग और आमजन द्वारा 771.919 लाख पौधे लगाए गए, जो वन विभाग के दावे से कहीं अधिक हैं।

 

पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय जिलों में पौधरोपण और जीवितता दर दोनों बेहतर रही। वर्ष 2023-24 में जैसलमेर में 25.170 लाख पौधे लगाए गए, जिनकी जीवितता दर 81 प्रतिशत से अधिक रही। बीकानेर में 19.907 लाख और नागौर में 10.790 लाख पौधे लगाए गए, जिनकी जीवितता दर क्रमशः 83 और 81.73 प्रतिशत रही। इसके विपरीत भरतपुर में केवल 1.600 लाख और राजसमंद में 2.500 लाख पौधे लगाए गए, जिनकी जीवितता दर क्रमशः 52.44 प्रतिशत रही।

 

वर्ष 2024-25 में भी यही प्रवृत्ति जारी रही। जैसलमेर में 35.620 लाख (जीवितता दर 89.39%), बीकानेर में 20.698 लाख (जीवितता दर 83.4%) और नागौर में 12.040 लाख (जीवितता दर 82.79%) पौधे लगाए गए। जबकि राजसमंद, डूंगरपुर, भरतपुर और दौसा में पौधरोपण बहुत कम रहा।

 

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विभाग के दावे सही होते, तो मरुस्थलीय जिलों की तस्वीर पूरी तरह बदल जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि वन विभाग की हरियाली अधिकतर फाइलों तक सीमित दिखती है, जबकि धरातल पर सूखा और बंजर भूमि ही अधिक दिखाई देती है।

 

हालांकि पश्चिमी राजस्थान में आमजन की देखरेख और सिंचाई के कारण कुछ क्षेत्रों में हरियाली बढ़ी है। नागौर में पिछले वर्षों में हरित क्षेत्र बढ़ने के साथ औसत वर्षा में भी सुधार देखा गया है। यह दर्शाता है कि जमीन पर असली बदलाव में प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है।

 

वन विभाग की ओर से वर्ष 2023-24 में प्रदेश में रोपे गए कुल पौधे - 263.726 लाख
वन विभाग की ओर से वर्ष 2024-25 में प्रदेश में रोपे गए कुल पौधे - 248.342 लाख
दो साल में वन विभाग की ओर से कुल पौधे लगाए गए - 512.068 लाख
अन्य विभागों की ओर से 2023-24 में प्रदेश में रोपे गए कुल पौधे - 103.500 लाख
आमजन की ओर से 2023-24 में प्रदेश में रोपे गए कुल पौधे - 194.462 लाख
अन्य विभागों की ओर से 2024-25 में प्रदेश में रोपे गए कुल पौधे - 411.861 लाख
आमजन की ओर से 2024-25 में प्रदेश में रोपे गए कुल पौधे - 62.096 लाख
दो साल में अन्य विभागों व आमजन की ओर से कुल पौधे लगाए गए- 771.919 लाख

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