Edited By Ishika Jain, Updated: 31 Mar, 2026 06:00 PM

राजस्थान के दौसा में सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण-पत्र जारी करने के बड़े मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो डॉक्टरों और एक रेडियोग्राफर को गिरफ्तार किया है। कोर्ट के आदेश के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह मामला राज्य में...
राजस्थान के दौसा में सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण-पत्र जारी करने के बड़े मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो डॉक्टरों और एक रेडियोग्राफर को गिरफ्तार किया है। कोर्ट के आदेश के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह मामला राज्य में इस तरह की धोखाधड़ी में पहली बड़ी गिरफ्तारी माना जा रहा है।
413 फर्जी सर्टिफिकेट, करोड़ों का नुकसान
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 413 फर्जी सिलिकोसिस प्रमाण-पत्र जारी किए, जिसके जरिए सरकार को करीब 12.39 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ। यह गड़बड़ी ऑटो-अप्रूवल प्रक्रिया के जरिए सामने आई।
एक ही एक्स-रे से बनाए कई सर्टिफिकेट
जांच एजेंसियों के अनुसार, रेडियोग्राफर द्वारा एक ही एक्स-रे का बार-बार इस्तेमाल कर अलग-अलग फाइलों में लगाया जाता था। इसके आधार पर फर्जी प्रमाण-पत्र जारी किए जाते थे, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हुए हैं।
पूरे प्रदेश में फैला नेटवर्क
मामले की जांच में कुल 22 कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई, जिनमें से 13 अकेले दौसा जिले से जुड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में जारी कुल सर्टिफिकेट्स में से लगभग 45% दौसा में ही बनाए गए थे, जिससे यहां गड़बड़ी की आशंका बढ़ी।
जांच के बाद हुई कार्रवाई
एसएमएस मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ कमेटी और जिला स्तर की जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए
- डॉ. मनोज ऊंचवाल
- डॉ. डीएन शर्मा
- रेडियोग्राफर मनोहर लाल
को गिरफ्तार किया।
गलत लोगों को फायदा, असली मरीज वंचित
जांच में यह भी सामने आया कि जिन लोगों को सिलिकोसिस नहीं था, उन्हें भी सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए, जबकि वास्तविक मरीजों के आवेदन खारिज कर दिए गए। इससे जरूरतमंद लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
क्या है सिलिकोसिस बीमारी
सिलिकोसिस एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी है, जो खदानों या धूल भरे वातावरण में काम करने वाले श्रमिकों में पाई जाती है। इसमें सिलिका युक्त धूल सांस के जरिए फेफड़ों में जमा हो जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों को स्थायी नुकसान होता है।
सरकारी योजना में मिलती है मदद
राज्य सरकार की 2019 की नीति के तहत सिलिकोसिस मरीज को 3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। मृत्यु होने पर परिवार को 2 लाख रुपए और अंतिम संस्कार के लिए 10 हजार रुपए मिलते हैं। इसके अलावा मरीज को हर महीने 1500 रुपए पेंशन भी दी जाती है।