Edited By Afjal Khan, Updated: 09 Mar, 2026 05:42 PM

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के प्रमुख शहर चूरू में रविवार को वीरता और सम्मान का विशेष माहौल देखने को मिला। भारतीय सेना की ओर से आयोजित “गौरव सेनानी समारोह” में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के सैन्य इतिहास को नमन...
चूरू : राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के प्रमुख शहर चूरू में रविवार को वीरता और सम्मान का विशेष माहौल देखने को मिला। भारतीय सेना की ओर से आयोजित “गौरव सेनानी समारोह” में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के सैन्य इतिहास को नमन करते हुए बड़ी घोषणा की। उन्होंने चूरू जिला खेल स्टेडियम का नाम 1971 के युद्ध के नायक लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह राठौड़ के नाम पर रखने का ऐलान किया।
युवाओं को मिलेगी देशभक्ति की प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टेडियम का नाम बदलने का उद्देश्य केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि इससे यहां आने वाले युवा खिलाड़ियों को देशभक्ति, साहस और नेतृत्व की प्रेरणा मिलेगी। अब चूरू का यह स्टेडियम खेल प्रतिभाओं के साथ-साथ वीर सैनिकों की गौरवगाथा का भी प्रतीक बनेगा।
सैन्य इतिहास के महान रणनीतिकार
लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल रहे हैं, जिनकी सैन्य रणनीति और नेतृत्व की चर्चा आज भी सैन्य अध्ययन में की जाती है। उनका जन्म राजस्थान के चूरू जिले के रतनगढ़ क्षेत्र के कुसुमदेसर गांव में हुआ था।
1971 के युद्ध में अहम भूमिका
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने भारतीय सेना की IV कोर का नेतृत्व किया। इस दौरान उनके नेतृत्व में चलाया गया मेघना हेली-लिफ्ट ऑपरेशन बेहद सफल रहा, जिसमें सेना ने हेलीकॉप्टर के जरिए मेघना नदी पार कर पाकिस्तानी सेना को चौंका दिया और ढाका तक भारतीय सेना की बढ़त का रास्ता साफ हुआ।
गोवा मुक्ति और नाथू ला संघर्ष में योगदान
1961 में पुर्तगाली शासन से गोवा को मुक्त कराने के लिए चलाए गए ऑपरेशन विजय में भी उन्होंने पैराशूट ब्रिगेड का नेतृत्व किया। वहीं 1967 में सिक्किम सीमा पर हुए नाथू ला संघर्ष के दौरान चीनी घुसपैठ का मुकाबला करने में भी उनकी भूमिका अहम रही।
उनकी सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) और पदम भूषण से सम्मानित किया गया था।
पूर्व सैनिकों को दिए नियुक्ति पत्र
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्व सैनिकों के पुनर्वास पर भी जोर दिया। उन्होंने विभिन्न विभागों और निजी संस्थानों में चयनित पूर्व सैनिकों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का सम्मान और उनकी सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर पुनर्वास सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस मौके पर मनजिंदर सिंह, जो सप्त शक्ति कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ हैं, भी समारोह में मौजूद रहे और राज्य सरकार की पहल की सराहना की।