जोधपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई

Edited By Anil Jangid, Updated: 16 Mar, 2026 02:11 PM

action against jodhpur central jail superintendent

जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने के बाद जेल अधीक्षक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। जोधपुर सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत को एपीओ कर दिया गया है। राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में...

जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने के बाद जेल अधीक्षक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। जोधपुर सेंट्रल जेल के जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत को एपीओ कर दिया गया है। राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए उन्हें आगामी आदेशों तक महानिदेशालय कारागार, जयपुर में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

 

दरअसल, हाल ही में जोधपुर सेंट्रल जेल में तलाशी अभियान के दौरान कैदियों के पास से 13 मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड बरामद किए गए थे। इस घटना के सामने आने के बाद जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे। बताया जा रहा है कि जेल के भीतर मोबाइल और सिम मिलने की सूचना के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए विशेष तलाशी अभियान चलाया था।

 

तलाशी अभियान के दौरान कुछ कैदियों ने विरोध भी किया था। हालांकि जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत ने मौके पर मौजूद रहकर कैदियों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया था। इसके बावजूद जेल के अंदर मोबाइल फोन मिलने की घटना को गंभीर सुरक्षा चूक माना जा रहा है, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है।

 

इसी बीच जेल में आयोजित रोजा इफ्तार पार्टी की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। तस्वीरों के वायरल होने के बाद जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए थे।

 

इसके अलावा यह भी सामने आया कि जेल मुख्यालय के आदेश पर एक जाति विशेष के कैदियों को एक ही बैरक में रखा गया था। इस मुद्दे को लेकर भी काफी चर्चा हुई और प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर समीक्षा की गई।

 

मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल प्रशासन ने रातानाडा थाने में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज करवाए हैं। साथ ही जेल अधीक्षक की ओर से जोधपुर पुलिस कमिश्नर को भी शिकायत दी गई है। शिकायत में जेल में मोबाइल फोन पहुंचाने और उन्हें संचालित करने वाले पूरे गिरोह की जांच कराने की मांग की गई है।

 

फिलहाल प्रशासन इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। जांच के बाद यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

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