मुकाम धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब: फाल्गुनी मेले में गूंजे ‘जम्भोजी’ के जयकारे

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 18 Feb, 2026 07:28 PM

a wave of faith surged in muqaam dham

राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा स्थित मुकाम धाम में आज फाल्गुनी मेले के अवसर पर आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला।

राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा स्थित मुकाम धाम में आज फाल्गुनी मेले के अवसर पर आस्था और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बिश्नोई समाज के मुख्य तीर्थ स्थल मुकाम में देशभर से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और पर्यावरण संरक्षण के प्रणेता गुरु जम्भेश्वर भगवान की समाधि पर मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की।

मुकाम धाम बिश्नोई समाज का सबसे बड़ा आस्था केंद्र है, जहां गुरु जम्भेश्वर भगवान का समाधि स्थल स्थित है। यहां साल में दो बार—आश्विन और फाल्गुन मास में—विशाल मेले का आयोजन होता है। यह मेला समाज की एकता, 29 नियमों के पालन और पर्यावरण के प्रति उनकी अटूट आस्था का प्रतीक माना जाता है।

मेले के दौरान पूरा परिसर ‘जम्भोजी’ के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर दर्शन किए और विशाल हवन कुंड में घी व खोपरे की आहुतियां दीं।

मुकाम का इतिहास

मान्यता है कि गुरु जम्भेश्वर भगवान ने समराथल धोरे पर निर्वाण प्राप्त किया था। बाद में इसी पावन स्थल को ‘मुकाम’ नाम दिया गया, जिसका अर्थ है विश्राम स्थल। संतों ने निर्णय लिया था कि हर छह माह में समाज यहां एकत्र होकर धर्म, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों पर चर्चा करेगा—जो आगे चलकर मेले का रूप ले लिया।

प्रशासन अलर्ट

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, पेयजल, चिकित्सा शिविर और भंडारों की व्यापक व्यवस्था की गई है।
 

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