Edited By Anil Jangid, Updated: 22 Jul, 2026 02:21 PM

जैसलमेर : जैसलमेर जिले में राज्य राजमार्ग संख्या-40 (पोकरण-फलसूंड मार्ग) पर पौधरोपण योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
जैसलमेर : जैसलमेर जिले में राज्य राजमार्ग संख्या-40 (पोकरण-फलसूंड मार्ग) पर पौधरोपण योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिस परियोजना के तहत करीब 12 हजार पौधे लगाए जाने थे, वह धरातल पर लगभग नदारद है। मौके पर लगाए गए लगभग 300 पौधे भी अब दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष जुलाई माह में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने पोकरण-फलसूंड मार्ग के दोनों ओर पौधरोपण की योजना तैयार की थी। प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से कई राज्य राजमार्गों का चयन किया गया था। इसी क्रम में पोकरण से फलसूंड तक लगभग 70 किलोमीटर लंबे मार्ग में आबादी वाले हिस्सों को छोड़कर करीब 50 से 60 किलोमीटर क्षेत्र में पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
बताया जा रहा है कि योजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई और पौधों की खरीद, गड्ढों की खुदाई, रोपण, सिंचाई और रखरखाव के लिए बजट भी स्वीकृत किया गया। योजना के अनुसार करीब 12 हजार पौधे लगाए जाने थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कार्यकारी एजेंसी ने केवल लगभग 300 पौधे लगाए। इतना ही नहीं, इन पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और देखरेख की भी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई, जिसके चलते लगाए गए पौधे भी नष्ट हो गए या अब मौके पर दिखाई नहीं देते।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई अहम सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हजारों पौधे लगाने के लिए बजट स्वीकृत हुआ था तो उसका उपयोग किस प्रकार किया गया? क्या पौधों की खरीद और रोपण का कार्य पूरी तरह किया गया था या केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहा? यदि पौधरोपण अधूरा रहा तो संबंधित कार्यकारी एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और जिम्मेदारी किसकी तय की गई?
इसके अलावा यह भी सवाल उठ रहा है कि पौधरोपण के बाद नियमित निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी किस विभाग या अधिकारी के पास थी। यदि पौधे लगाए गए थे तो उनके संरक्षण, सिंचाई और सुरक्षा की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? पर्यावरण संरक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजना के बावजूद धरातल पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अब सभी की निगाहें सार्वजनिक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और कार्यकारी एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल यह मामला जैसलमेर में चर्चा का विषय बना हुआ है और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।