Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Feb, 2026 06:20 PM

नागौर। राजस्थान का नागौर जिला एक बार फिर अपनी पारंपरिक सामाजिक परंपराओं और भव्य मायरे के कारण चर्चा में है। जायल कस्बे में भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक मूल्यों की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली, जहां दो सगे भाइयों ने अपनी बहन के बेटे की शादी में 1...
नागौर। राजस्थान का नागौर जिला एक बार फिर अपनी पारंपरिक सामाजिक परंपराओं और भव्य मायरे के कारण चर्चा में है। जायल कस्बे में भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक मूल्यों की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली, जहां दो सगे भाइयों ने अपनी बहन के बेटे की शादी में 1 करोड़ 61 लाख रुपये का मायरा भरकर सभी को चौंका दिया। इसे वर्ष 2026 का अब तक का सबसे बड़ा मायरा बताया जा रहा है।
जायल निवासी ललित कुमार व्यास और ओमप्रकाश व्यास ने अपनी बहन गायत्री देवी के पुत्र नीलेश की शादी के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मायरा की रस्म निभाई। इस मायरे में 81 लाख रुपये नकद, 25 तोला सोना और भारी मात्रा में चांदी के आभूषण शामिल किए गए। इतनी बड़ी राशि और बहुमूल्य उपहारों को देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
गौरतलब है कि इससे पहले पिछले वर्ष नागौर जिले के झाड़ेली गांव में पोटलिया परिवार द्वारा 21 करोड़ 11 लाख रुपये का मायरा भरने की घटना ने पूरे राजस्थान में सुर्खियां बटोरी थीं। अब जायल का यह मायरा भी उसी कड़ी में एक और ऐतिहासिक उदाहरण बन गया है।
मायरा की रस्म जायल स्थित माहेश्वरी भवन में पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर समाज के कई गणमान्य लोग, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में उत्सव, उल्लास और पारिवारिक सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।
परिवार के मुखिया श्यामसुंदर व्यास की मौजूदगी में दोनों भाइयों ने अपनी बहन गायत्री देवी को चुनड़ी ओढ़ाकर मायरा की रस्म पूरी की। यह क्षण बेहद भावुक रहा, जिसने भाई-बहन के अटूट प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की गहराई को दर्शाया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक परंपराओं और संस्कारों का पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ पालन किया गया।
इतनी बड़ी राशि का मायरा भरने की यह घटना न केवल ब्राह्मण समाज, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोग इसे पारिवारिक परंपराओं के सम्मान और भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का जीवंत उदाहरण बता रहे हैं। नागौर एक बार फिर यह साबित करने में सफल रहा कि यहां की सामाजिक परंपराएं आज भी जीवित हैं और नई पीढ़ी तक मजबूती से पहुंच रही हैं।