Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Feb, 2026 05:56 PM

जोधपुर। राजस्थान में इन दिनों एक नया साइबर अपराध लोगों के बीच दहशत का कारण बनता जा रहा है, जिसे ‘डिब्बा कॉल’ धमकी कहा जा रहा है। हाल ही में हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के दो कारोबारियों को इस तरह की कॉल के जरिए जान से मारने और भारी रकम की फिरौती देने की...
जोधपुर। राजस्थान में इन दिनों एक नया साइबर अपराध लोगों के बीच दहशत का कारण बनता जा रहा है, जिसे ‘डिब्बा कॉल’ धमकी कहा जा रहा है। हाल ही में हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के दो कारोबारियों को इस तरह की कॉल के जरिए जान से मारने और भारी रकम की फिरौती देने की धमकी दी गई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को कुख्यात लॉरेंस गैंग से जुड़ा बताते हुए लॉरेंस के भाई ‘आरजू’ होने का दावा किया।
आरोपी ने दोनों कारोबारियों से 48 घंटे के भीतर एक-एक करोड़ रुपये, कुल दो करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। खास बात यह रही कि धमकी देने वाला और कॉल रिसीव करने वाला दोनों ही व्यक्ति भारत से बाहर थे, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डिजिटल युग में अपराध का तरीका भी पूरी तरह बदल चुका है। अब अपराधी आमने-सामने आकर नहीं, बल्कि मोबाइल फोन के जरिए लोगों को डराने और पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं। ‘डिब्बा कॉल’ धमकी इसी का एक खतरनाक उदाहरण है, जिसने व्यापारियों, डॉक्टरों, ठेकेदारों और आम नागरिकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
डिब्बा कॉल ऐसी फोन कॉल होती है, जिसमें कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को किसी बड़े गैंग, माफिया या कुख्यात अपराधी से जुड़ा बताता है। कॉल के दौरान साफ तौर पर या इशारों में यह कहा जाता है कि अगर तय रकम नहीं दी गई, तो जान-माल को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। कई मामलों में आरोपी पीड़ित के घर, दुकान, ऑफिस या परिवार से जुड़ी जानकारियां बताकर डर को और गहरा कर देता है।
इस तरह की कॉल को ‘डिब्बा कॉल’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये अक्सर फर्जी, अस्थायी या ट्रेस न होने वाले मोबाइल नंबरों से की जाती हैं। पहले ऐसे फोन को आम बोलचाल में ‘डिब्बा फोन’ कहा जाता था।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर डिब्बा कॉल फर्जी होती हैं, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है। कई बार यही कॉल आगे चलकर बड़े अपराध की भूमिका बन जाती हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि किसी को ऐसी कॉल आए तो घबराएं नहीं, कॉल करने वाले से बहस न करें, कॉल रिकॉर्डिंग और मैसेज सुरक्षित रखें और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें। बिना किसी पुष्टि के किसी भी प्रकार का भुगतान न करें।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि जागरूकता ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। समय पर शिकायत करने से अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सकता है।