झालावाड़ में मोरी–सोयला जलाशय परियोजनाओं को मिली रफ्तार: पानी की समस्या का होगा स्थायी समाधान!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 09 Apr, 2026 02:02 PM

jhalawar mori soyla water reservoir project inspection progress

राजस्थान के झालावाड़ जिले में पानी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के बजट में प्रस्तावित मोरी (तहसील बकानी) और सोयला (तहसील रायपुर) कृत्रिम जलाशय परियोजनाओं को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।...

राजस्थान के झालावाड़ जिले में पानी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। वर्ष 2026-27 के बजट में प्रस्तावित मोरी (तहसील बकानी) और सोयला (तहसील रायपुर) कृत्रिम जलाशय परियोजनाओं को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में उच्च अधिकारियों की एक टीम ने दोनों प्रस्तावित स्थलों का दौरा कर परियोजनाओं की प्रगति और तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान डी.एन. शर्मा (अतिरिक्त मुख्य अभियंता), अजीत कुमार जैन (अधीक्षण अभियंता) सहित विभागीय इंजीनियर मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्थल पर पहुंचकर भू-स्थिति, जल संग्रहण की संभावनाओं और निर्माण कार्य से जुड़े तकनीकी पहलुओं का गहन निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ये दोनों परियोजनाएं क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही जल समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.एन. शर्मा ने निर्देश दिए कि इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द शुरू किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।

अधिकारियों के अनुसार, इन कृत्रिम जलाशयों के निर्माण से क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। इससे न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार देखने को मिलेगा। खासकर उन इलाकों के लिए यह परियोजना बेहद फायदेमंद साबित होगी, जहां हर साल पानी की कमी के कारण खेती प्रभावित होती है।

इसके साथ ही इन परियोजनाओं का एक बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर बनाना भी है। जलाशयों के निर्माण से गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने तकनीकी पहलुओं पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सर्वे कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और जलाशय की क्षमता निर्धारित करने के लिए कैपेसिटी टेबल तैयार की जाए। इसके अलावा, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले बोरो एरिया में मिट्टी की गुणवत्ता की जांच और जियो-टेक्निकल परीक्षण अनिवार्य रूप से कराए जाएं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या न आए।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाए। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया, जिससे परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से और प्रभावी तरीके से हो सके।

स्थानीय लोगों और किसानों ने भी इन परियोजनाओं को लेकर उम्मीद जताई है। उनका मानना है कि यदि ये योजनाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो क्षेत्र में जल संकट की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। इससे न केवल खेती को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र का समग्र विकास भी संभव हो सकेगा।

कुल मिलाकर, मोरी और सोयला जलाशय परियोजनाएं झालावाड़ जिले के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती हैं। प्रशासन की सक्रियता और योजनाबद्ध तरीके से किए जा रहे प्रयास इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में जिले में जल प्रबंधन की स्थिति बेहतर होगी।

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