Edited By Payal Choudhary, Updated: 11 Apr, 2026 02:51 PM

राजस्थान के जालोर जिले में छात्रों को डिजिटल दुनिया के खतरों से जागरूक करने के लिए एक सराहनीय पहल की गई। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर विभिन्न स्कूलों में साइबर सुरक्षा जागरूकता शिविर आयोजित किए गए, जहां न्यायिक अधिकारियों ने...
राजस्थान के जालोर जिले में छात्रों को डिजिटल दुनिया के खतरों से जागरूक करने के लिए एक सराहनीय पहल की गई। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर विभिन्न स्कूलों में साइबर सुरक्षा जागरूकता शिविर आयोजित किए गए, जहां न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए।
यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य छात्रों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार सिखाना है।
इंटरनेट उपयोग में सावधानी की सलाह
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सांकरणा में प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश अहसान अहमद ने छात्रों को इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि हर ऑनलाइन गतिविधि का रिकॉर्ड रहता है।
उन्होंने छात्रों को ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों को जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करते हैं।
सोशल मीडिया और OTP फ्रॉड से सावधान
नारणावास के स्कूल में एसीजेएम अंकित दवे ने सोशल मीडिया के खतरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें और किसी भी स्थिति में अपना OTP किसी के साथ साझा न करें।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर लालच, डर या झूठे ऑफर के जरिए लोगों को फंसाते हैं, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
साइबर बुलिंग और फर्जी अकाउंट पर चर्चा
देवकी गांव के स्कूल में किशोर न्याय बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट गजेंद्र कुमार ने साइबर बुलिंग, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट, पहचान की चोरी और निजी फोटो के दुरुपयोग जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने छात्रों को बताया कि अगर कोई उन्हें ऑनलाइन परेशान करता है या उनकी जानकारी का गलत इस्तेमाल करता है, तो वे तुरंत इसकी शिकायत करें और चुप न रहें।
हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी
शिविर के दौरान छात्रों को आपात स्थिति में मदद के लिए महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर भी बताए गए:
- 1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन
- 112 – पुलिस सहायता
- 1930 – साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन
अधिकारियों ने बताया कि इन नंबरों पर तुरंत संपर्क कर सहायता प्राप्त की जा सकती है।
जागरूकता से ही बचाव संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा की जानकारी होना बेहद जरूरी है, खासकर बच्चों और किशोरों के लिए। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम न केवल उन्हें सुरक्षित रखते हैं, बल्कि जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने में भी मदद करते हैं।
कुल मिलाकर, जालोर में आयोजित यह अभियान छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ, जिसने उन्हें साइबर खतरों से बचने और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की दिशा में एक मजबूत कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।