संत हरवंशसिंह निर्मल का 16वां स्मृति दिवस: भादरिया मंदिर में विशेष पूजा, चरण पादुका पूजन और महाप्रसादी आज 4 लाठी क्षेत

Edited By Payal Choudhary, Updated: 19 Feb, 2026 05:46 PM

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लाठी क्षेत्र में आज संत हरवंशसिंह निर्मल भादरिया महाराज का 16वां स्मृति दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भादरिया मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

लाठी क्षेत्र में आज संत हरवंशसिंह निर्मल भादरिया महाराज का 16वां स्मृति दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भादरिया मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।

गौ सेवा, शिक्षा और पर्यावरण के लिए समर्पित रहा जीवन

संत हरवंशसिंह निर्मल का जन्म वर्ष 1930 में हुआ था। वे विद्या वाचस्पति अलंकार से विभूषित थे और आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़े रहे। उन्होंने लगभग आधी शताब्दी तक गौ सेवा, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।

वर्ष 1960 में वे भादरिया पहुंचे। यहां स्थित मंदिर परिसर में उन्हें अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति हुई, जिसके बाद उन्होंने इसी भूमि को अपनी कर्मस्थली बना लिया। उस समय फील्ड फायरिंग रेंज के पास स्थित छोटा-सा गांव भादरिया, उनके प्रयासों से देशभर में प्रसिद्ध हुआ। 15 फरवरी 2010 को वे ब्रह्मलीन हो गए।

शक्ति हवन और भजन संध्या में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

जगदंबा सेवा समिति के राष्ट्रीय सचिव जुगल किशोर आसेरा के अनुसार, स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को मंदिर परिसर में शक्ति हवन का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आहुति देकर संत के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की।

शाम को आयोजित भजन संध्या में कलाकारों ने रातभर भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु देर रात तक भजनों का आनंद लेते रहे।

आज सुबह विशेष पूजा-अर्चना और महाप्रसादी

गुरुवार सुबह 8:30 बजे जगदंबा सेवा समिति परिवार और भक्तजनों द्वारा भादरिया महाराज की समाधि पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद सैकड़ों श्रद्धालु चरण पादुका पूजन में भाग लेंगे।

पूजन के उपरांत महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे।

भव्य सजावट और व्यवस्थाएं

स्मृति दिवस को लेकर मंदिर परिसर और समाधि स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। समिति की ओर से ठहरने और विश्राम की समुचित व्यवस्था भी की गई है। आसपास के गांवों से श्रद्धालु बुधवार शाम से ही भादरिया पहुंचने लगे थे।

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