बैल की निर्मम हत्या से उबाल: जैसलमेर में हिंदू संगठनों का आक्रोश, पोकरण बंद और विशाल आंदोलन का ऐलान

Edited By Anil Jangid, Updated: 09 Jan, 2026 07:41 PM

outrage over brutal killing of bull in jaisalmer

जैसलमेर। पोकरण थाना क्षेत्र के केलावा गांव के पास बैल की निर्मम हत्या के मामले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। इस घटना को लेकर हिंदू समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी...

जैसलमेर। पोकरण थाना क्षेत्र के केलावा गांव के पास बैल की निर्मम हत्या के मामले ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। इस घटना को लेकर हिंदू समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को पोकरण बंद और विशाल हिंदू आंदोलन का ऐलान किया गया है।

 

सीमाजन कल्याण समिति परिसर में आयोजित विशेष बैठक में पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी महाराज, पूर्व विधायक सांगसिंह भाटी, पूर्व विधायक शैतानसिंह राठौड़ सहित कई हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और समाज के लोग उपस्थित रहे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

 

पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी महाराज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर बात कर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को आरोपियों की जड़ों तक पहुंचकर गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्वयं पूरे प्रकरण की निगरानी करने और मुख्यमंत्री से मिलकर कठोर कार्रवाई की मांग करने की बात कही।

 

हिंदू संगठनों ने शनिवार को पोकरण बाजार बंद रखने की अपील की है। साथ ही हजारों की संख्या में हिंदू समाज के लोग पंचायत समिति सांकड़ा परिसर के बाहर एकत्र होकर विशाल जुलूस निकालेंगे और एसडीएम कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

 

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पशु क्रूरता की ऐसी घटनाएं समाज को झकझोरने वाली हैं और इन्हें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों को जल्द सजा नहीं मिली तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा।

 

इस मामले ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और पशु संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और पुलिस के लिए यह एक बड़ी परीक्षा बन गई है कि वे कितनी जल्दी और प्रभावी कार्रवाई कर जनता के आक्रोश को शांत कर पाते हैं।

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