राजस्थान के रेगिस्तान में दुश्मन के विमान-ड्रोन पलभर में राख: स्ट्रेला-10M से भारतीय सेना का सटीक वार!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 20 Feb, 2026 07:53 PM

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राजस्थान के रेतीले धोरों में भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता और तकनीकी ताकत का जबरदस्त प्रदर्शन किया। दुश्मन के विमान और ड्रोन को हवा में ही खत्म करने के लिए सेना ने अत्याधुनिक Strela-10M एयर डिफेंस सिस्टम के साथ युद्धाभ्यास किया। इस अभ्यास में सेना...

राजस्थान के रेतीले धोरों में भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता और तकनीकी ताकत का जबरदस्त प्रदर्शन किया। दुश्मन के विमान और ड्रोन को हवा में ही खत्म करने के लिए सेना ने अत्याधुनिक Strela-10M एयर डिफेंस सिस्टम के साथ युद्धाभ्यास किया। इस अभ्यास में सेना की कोणार्क कॉर्प्स के जांबाज ‘डेजर्ट वॉरियर्स’ ने हिस्सा लिया और साफ संदेश दिया कि भारतीय सीमा और आसमान पूरी तरह सुरक्षित हैं।

यह युद्धाभ्यास खास तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों को नष्ट करने की क्षमता को परखने के लिए आयोजित किया गया था। आधुनिक युद्ध में ड्रोन और छोटे विमान सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं। ऐसे में Strela-10M जैसे मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम सेना की पहली रक्षा पंक्ति साबित हो रहे हैं।

चलता-फिरता किला है Strela-10M

Strela-10M एक शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसका ‘इन्फ्रारेड सीकर’ है, जो दुश्मन के विमान या ड्रोन के इंजन से निकलने वाली गर्मी को पहचान लेता है। एक बार लक्ष्य लॉक हो जाने के बाद मिसाइल उसका पीछा करती है और हवा में ही उसे नष्ट कर देती है।

यह सिस्टम एक चैन वाले बख्तरबंद वाहन (MT-LB) पर तैनात होता है। यह वाहन रेगिस्तान की रेत, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और कठिन परिस्थितियों में भी तेज रफ्तार से आगे बढ़ सकता है। इसी वजह से इसे ‘चलता-फिरता किला’ भी कहा जाता है। युद्ध के दौरान यह सिस्टम टैंकों और सैनिकों की टुकड़ियों के साथ चलता है और उन्हें हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करता है।

कोणार्क कॉर्प्स के डेजर्ट वॉरियर्स का दम

सेना की कोणार्क कॉर्प्स, जिसे ‘डेजर्ट कॉर्प्स’ के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिमी सीमा की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। इस अभ्यास के दौरान ‘ब्लेजिंग स्काइज ब्रिगेड’ के सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी सटीक निशानेबाजी का प्रदर्शन किया।

भीषण गर्मी, उड़ती रेत और चुनौतीपूर्ण हालात के बीच जवानों ने लक्ष्य को पहचानने और नष्ट करने में असाधारण धैर्य और सटीकता दिखाई। अभ्यास का नारा था — “Forged for Firepower, Ready for Battle”। यह संदेश साफ था कि सेना हर चुनौती के लिए तैयार है।

सीमा सुरक्षा में अहम भूमिका

राजस्थान की अंतरराष्ट्रीय सीमा लंबी और खुली है। दुश्मन के ड्रोन या छोटे विमान कम ऊंचाई पर उड़कर घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में Strela-10M जैसे मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

ये सिस्टम रडार की पकड़ से बचने की कोशिश करने वाले लक्ष्यों को भी पहचान सकते हैं और तुरंत कार्रवाई कर सकते हैं। युद्ध की स्थिति में यह सेना की जमीनी टुकड़ियों को हवाई हमलों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

27 फरवरी से ‘वायु शक्ति-2026’

जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में 27 फरवरी से दो साल में एक बार होने वाला भव्य युद्धाभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ आयोजित होगा। इसकी फुल ड्रेस रिहर्सल 24 फरवरी को होगी, जबकि मुख्य कार्यक्रम 27 फरवरी को आयोजित किया जाएगा।

इस दौरान भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करेगी। फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने और सेना को हवाई समर्थन देने की क्षमता दिखाएंगे।

अभ्यास में लगभग 12 हजार किलोग्राम बारूद का इस्तेमाल किया जाएगा और 277 अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन होगा। बताया जा रहा है कि इस विशेष आयोजन को देखने के लिए देश के शीर्ष नेतृत्व के शामिल होने की संभावना है।

हर चुनौती से निपटने को तैयार

राजस्थान के रेगिस्तान में हुए इस अभ्यास ने यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना आधुनिक तकनीक और रणनीति से लैस है। Strela-10M जैसे सिस्टम कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं।

डेजर्ट वॉरियर्स की सटीकता और साहस ने एक बार फिर दिखा दिया कि भारतीय सीमा की ओर आंख उठाने से पहले दुश्मन को कई बार सोचना पड़ेगा। सेना हर मिशन के लिए तैयार है — जमीन पर भी और आसमान में भी।

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