SMS अस्पताल में बदइंतजामी: पैर कटे मरीज को भी ट्रोमा से धनवंतरी ओपीडी भेजा, गंभीर घायल मरीजों को काटने पड़े चक्कर

Edited By Payal Choudhary, Updated: 13 Mar, 2026 06:59 PM

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जयपुर। राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) के ट्रोमा सेंटर की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां गंभीर रूप से घायल मरीजों को इलाज से पहले दूसरे विभाग से रेफरेंस लेने के लिए ट्रोमा सेंटर से मुख्य बिल्डिंग स्थित...

जयपुर। राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) के ट्रोमा सेंटर की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां गंभीर रूप से घायल मरीजों को इलाज से पहले दूसरे विभाग से रेफरेंस लेने के लिए ट्रोमा सेंटर से मुख्य बिल्डिंग स्थित धनवंतरी ओपीडी भेजा जा रहा है। इस कारण घायल और हाथ-पैर टूटे मरीजों को एम्बुलेंस में अस्पताल परिसर के अंदर ही एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

परिजनों का कहना है कि गंभीर हालत में मरीजों को बार-बार इधर-उधर ले जाने से उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है। जबकि अस्पताल में रेफरेंस की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और जरूरत होने पर संबंधित डॉक्टर मरीज को देखने के लिए उसके बेड तक पहुंच सकते हैं।

पैर कटने के बाद भी भेजा ओपीडी

ऐसा ही एक मामला टोंक जिले के 30 वर्षीय युवक देशराज का सामने आया है। देशराज 9 मार्च को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। हादसे में उसका एक पैर कट गया, जबकि दूसरा पैर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

घायल देशराज को इलाज के लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में भर्ती कराया गया। लेकिन 12 मार्च को उसे सर्जरी विभाग से रेफरेंस लेने के लिए ट्रोमा सेंटर से धनवंतरी ओपीडी भेज दिया गया।

परिजन बड़ी मुश्किल से उसे एम्बुलेंस में बैठाकर ओपीडी तक लेकर पहुंचे। वहां करीब एक घंटे तक इंतजार करने के बाद सर्जरी के डॉक्टर को दिखाकर रेफरेंस लिया गया।

घायल मरीजों को भी लग रहे चक्कर

इसी तरह का मामला 21 वर्षीय गोविंद के साथ भी सामने आया। एक दुर्घटना में गोविंद के दोनों पैर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ट्रोमा सेंटर में भर्ती होने के बावजूद उसे भी सर्जरी विभाग के रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी भेज दिया गया।

एक अन्य मरीज साहिल का एक्सीडेंट होने के बाद उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया था। उसे भी ट्रोमा सेंटर से रेफरेंस के लिए ओपीडी भेज दिया गया। साहिल के परिजन उसे कंधे का सहारा देकर डॉक्टर के पास ले गए।

इन मामलों से यह साफ होता है कि गंभीर हालत में मरीजों को भी अस्पताल परिसर में अनावश्यक रूप से इधर-उधर भेजा जा रहा है।

ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद परेशानी

एसएमएस अस्पताल में रेफरेंस सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन है। यदि किसी मरीज को दूसरे विभाग के डॉक्टर को दिखाना होता है तो संबंधित डॉक्टर खुद मरीज के बेड तक जाकर जांच कर सकता है।

इसके बावजूद मरीजों को ट्रोमा सेंटर से धनवंतरी ओपीडी भेजा जाना अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है।

ट्रोमा सेंटर में नियमित विजिट करते हैं डॉक्टर

वर्तमान में जनरल सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. राजेन्द्र मांडिया को ट्रोमा सेंटर का इंचार्ज बनाया गया है।

ट्रोमा सेंटर में जनरल सर्जरी, न्यूरोसर्जरी और ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉक्टर नियमित रूप से विजिट करते हैं। इसके अलावा सर्जरी विभाग के डॉक्टर यहां ऑपरेशन भी करते हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब विशेषज्ञ डॉक्टर ट्रोमा सेंटर में उपलब्ध रहते हैं तो मरीजों को रेफरेंस के लिए ओपीडी क्यों भेजा जा रहा है।

इंचार्ज बोले- यह गलत है

इस मामले में ट्रोमा सेंटर के इंचार्ज डॉ. राजेन्द्र मांडिया ने कहा कि सर्जरी के मरीजों को रेफरेंस के लिए धनवंतरी ओपीडी भेजना गलत है।

उन्होंने कहा कि सर्जरी का रेफरेंस ट्रोमा सेंटर में ही हो सकता है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जांच कराई जाएगी।

मरीजों और परिजनों की बढ़ी परेशानी

ट्रोमा सेंटर में आने वाले अधिकांश मरीज गंभीर हालत में होते हैं। ऐसे में उन्हें बार-बार अस्पताल परिसर में इधर-उधर ले जाना उनके लिए बेहद कठिन होता है।

मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस व्यवस्था में सुधार करना चाहिए ताकि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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