व्याख्याताओं की काउंसलिंग से पहले प्रिंसिपल-वाइस प्रिंसिपल काउंसलिंग की मांग, समग्र शिक्षक संघ ने उठाई आवाज!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 29 Apr, 2026 07:18 PM

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राजस्थान समग्र शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को ज्ञापन देकर व्याख्याताओं की काउंसलिंग से पहले प्रधानाचार्य और उप प्रधानाचार्य की काउंसलिंग करवाने की मांग उठाई है।

राजस्थान में शिक्षा विभाग की काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। व्याख्याताओं की प्रस्तावित काउंसलिंग से पहले प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने को लेकर राजस्थान समग्र शिक्षक संघ ने सरकार के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन ने काउंसलिंग कैलेंडर में संशोधन की मांग करते हुए राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा है।

सरकार को भेजा गया ज्ञापन, प्रमुख मांगें रखी गईं

संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. उदयसिंह डिगार और प्रदेश मुख्य महामंत्री हरिश्चन्द्र प्रजापति ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को अलग-अलग ज्ञापन भेजकर यह मांग उठाई है कि नव पदोन्नत व्याख्याताओं की काउंसलिंग से पहले प्रधानाचार्य और उप प्रधानाचार्य की काउंसलिंग करवाई जाए।

संघ का कहना है कि वर्तमान प्रक्रिया में व्याख्याताओं को पर्याप्त विकल्प नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे न केवल शिक्षकों को नुकसान हो रहा है बल्कि इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।

काउंसलिंग में देरी से विकल्प सीमित होने की समस्या

कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष विजेन्द्र सिंह चौधरी ने बताया कि प्रधानाचार्य और उप प्रधानाचार्य के पदोन्नति के बाद अब तक उनकी काउंसलिंग नहीं करवाई गई है। इसके चलते कई पद अभी भी भरे नहीं जा सके हैं और रिक्तियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

उन्होंने कहा कि जब तक इन उच्च पदों पर काउंसलिंग पूरी नहीं होगी, तब तक व्याख्याताओं को सही और पर्याप्त विकल्प नहीं मिल सकते। इससे काउंसलिंग प्रक्रिया अधूरी और असंतुलित रह जाती है, जो लंबे समय में शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

क्रमोन्नत विद्यालयों में पद सृजन नहीं होने से बढ़ी चिंता

संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष यशवीर सिंह चौहान और रामनिवास जाखड़ ने एक और अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सैकड़ों विद्यालयों को क्रमोन्नत तो कर दिया है, लेकिन वहां अभी तक व्याख्याताओं के पद सृजित नहीं किए गए हैं।

ऐसे में इन स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। संघ का कहना है कि पहले इन विद्यालयों में पद सृजन किया जाए और फिर उन पदों को काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल किया जाए। इससे छात्रों को विषयवार शिक्षक मिल सकेंगे और शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी।

छात्र और शिक्षक हित में चरणबद्ध काउंसलिंग की मांग

प्रदेश उपाध्यक्ष पवन नामा ने स्पष्ट किया कि यह मांग किसी एक वर्ग के हित तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्र हित, शिक्षक हित और सरकार के प्रशासनिक हित—तीनों के लिए जरूरी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि काउंसलिंग की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। पहले प्रधानाचार्य, उसके बाद उप प्रधानाचार्य और अंत में व्याख्याताओं की काउंसलिंग करवाई जाए। इससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

संगठन के पदाधिकारियों का मिला व्यापक समर्थन

इस मुद्दे पर संगठन के कई पदाधिकारियों ने एकजुट होकर समर्थन जताया। प्रदेश उपाध्यक्ष जितेन्द्र भारद्वाज, प्रदेश मंत्री डालूराम मीना, जिला अध्यक्ष राजेश शर्मा, हरिपूजन सिंह गुर्जर, जिला मंत्री जितेन्द्र सिंह गुर्जर, सुनील शर्मा और जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहनी मोहन गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों ने इस मांग को मजबूती से उठाया।

संगठन का कहना है कि यदि सरकार समय रहते इस पर निर्णय नहीं लेती है, तो शिक्षा व्यवस्था में असंतुलन और गहराने की आशंका है।

क्या होगा अगला कदम?

अब नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। यदि काउंसलिंग कैलेंडर में संशोधन होता है, तो इससे हजारों शिक्षकों और लाखों छात्रों को राहत मिल सकती है। वहीं, यदि वर्तमान व्यवस्था जारी रहती है, तो विवाद और बढ़ सकता है।

फिलहाल, समग्र शिक्षक संघ ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर आगे भी आवाज उठाता रहेगा।

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