SI भर्ती विवाद: ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने सरकार को नार्को-पॉलीग्राफ टेस्ट की चुनौती दी!

Edited By Payal Choudhary, Updated: 10 Apr, 2026 10:38 AM

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राजस्थान की राजधानी जयपुर से सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चयनित ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने सरकार को नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट की खुली चुनौती दी है। अभ्यर्थियों ने अपने अभिभावकों के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल...

राजस्थान की राजधानी जयपुर से सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चयनित ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने सरकार को नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट की खुली चुनौती दी है। अभ्यर्थियों ने अपने अभिभावकों के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शपथ पत्र भेजकर कहा है कि वे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए किसी भी वैज्ञानिक जांच के लिए तैयार हैं।

शपथ पत्र में ट्रेनी एसआई के परिजनों ने स्पष्ट लिखा है कि उनके बच्चे स्वेच्छा से नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन परीक्षणों के परिणामों को ही अंतिम साक्ष्य माना जाए। यदि कोई अभ्यर्थी इन परीक्षणों में असफल पाया जाता है, तो सरकार उसे तत्काल बर्खास्त कर सकती है और उसकी निजी संपत्ति से वेतन की वसूली भी कर सकती है।

इस पूरे मामले में अभ्यर्थियों ने जांच एजेंसी एसओजी के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों ने कोर्ट में भ्रामक रिपोर्ट पेश कर मामले को गलत दिशा में मोड़ने की कोशिश की है। अभ्यर्थियों के अनुसार, यह एक सोची-समझी साजिश है, जिसके जरिए निर्दोष उम्मीदवारों की बलि देकर पिछली गलतियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।

अभिभावकों ने अपने पत्र में यह भी सवाल उठाया है कि राज्य में पिछली सरकार के दौरान हुई करीब 19 संदिग्ध भर्तियों में से 17 की जांच चल रही है, लेकिन किसी भी भर्ती को रद्द नहीं किया गया। ऐसे में केवल SI भर्ती-2021 को ही निशाना बनाना भेदभावपूर्ण निर्णय है, जो 750 से अधिक परिवारों को प्रभावित करेगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि यदि यह भर्ती रद्द होती है, तो यह राज्य के इतिहास में एक नकारात्मक उदाहरण बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे निर्दोष युवाओं और उनके परिवारों पर भारी असर पड़ेगा और यह सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े करेगा।

ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने सरकार से यह भी मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की मजबूती से पैरवी की जाए। उनका कहना है कि सरकार को कोर्ट में यह स्पष्ट करना चाहिए कि सेग्रीगेशन (पृथक्करण) संभव है और अभ्यर्थी स्वयं वैज्ञानिक जांच के लिए तैयार हैं। इससे निर्दोष उम्मीदवारों को न्याय मिल सकेगा।

गौरतलब है कि SI भर्ती-2021 को पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के चलते राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को रद्द कर दिया था। बाद में खंडपीठ ने भी 4 अप्रैल को इस फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार और चयनित अभ्यर्थियों की अपील खारिज कर दी थी।

इस पूरे विवाद ने राजस्थान में भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर सरकार और जांच एजेंसियां अनियमितताओं की जांच में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थी अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल एक भर्ती विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह न्याय, पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर सुप्रीम कोर्ट और सरकार का रुख बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

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