भावनात्मक समापन: ओसाका एक्सपो में कबीर यात्रा का रंगारंग समापन

Edited By Shruti Jha, Updated: 13 Jul, 2025 04:56 PM

kabir yatra concludes with a colourful ceremony at osaka expo

जापान के ओसाका एक्सपो में आयोजित 'कबीर यात्रा' का समापन एक भावनात्मक और सांस्कृतिक समागम के रूप में हुआ। इस आयोजन ने भारतीय लोक और सूफी संगीत की समृद्ध परंपराओं को जापानी दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया, जिससे सांस्कृतिक सेतु का निर्माण...

भावनात्मक समापन: ओसाका एक्सपो में कबीर यात्रा का रंगारंग समापन

 जापान के ओसाका एक्सपो में आयोजित 'कबीर यात्रा' का समापन एक भावनात्मक और सांस्कृतिक समागम के रूप में हुआ। इस आयोजन ने भारतीय लोक और सूफी संगीत की समृद्ध परंपराओं को जापानी दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया, जिससे सांस्कृतिक सेतु का निर्माण हुआ।

कार्यक्रम की विशेषताएँ:

  • सकूर खान और उनकी मंडली: जैसलमेर के सुप्रसिद्ध लोक और सूफी गायक सकूर खान ने पारंपरिक राजस्थानी स्वागत गीत "पधारो म्हारे देश" से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कबीर की प्रसिद्ध वाणियों जैसे "मन लाग्यो मेरो यार फकीरी में", "मन मस्त हुआ फिर क्या बोले" और सूफी रचना "छाप तिलक" को प्रस्तुत किया, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

  • संगतकारों की भूमिका: सकूर खान के साथ मंच पर ढोलक और खड़ताल जैसे वाद्ययंत्रों पर सजीव संगत करते नज़र आए लतीफ खान, सतर खान और फ्यूज़ खान, जिनकी लयबद्ध तालियों ने प्रस्तुति में ऊर्जा और गहराई भर दी।

  • भारत के कॉन्सुलेट जनरल की उपस्थिति: इस अवसर पर ओसाका-कोबे में भारत के कॉन्सुलेट जनरल के अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक मेलजोल की महत्ता को और भी पुष्ट किया।

  • सांस्कृतिक संवाद का सृजन: मलंग फोक फाउंडेशन और ओसाका यूनिवर्सिटी के इंडियन ओशन वर्ल्ड स्टडीज़ प्रोग्राम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा ने भारतीय संत परंपरा और जापानी समाज के बीच एक सजीव सांस्कृतिक पुल का कार्य किया।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का संगम:

'कबीर यात्रा' ने भारतीय संत कबीर की वाणियों के माध्यम से प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक एकता का संदेश दिया। इस आयोजन ने भारतीय संगीत और संस्कृति की विविधता को जापानी समाज के बीच प्रस्तुत किया, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिला।

निष्कर्ष:

ओसाका एक्सपो में आयोजित 'कबीर यात्रा' ने भारतीय लोक और सूफी संगीत की समृद्ध परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया, जिससे सांस्कृतिक सेतु का निर्माण हुआ और दोनों देशों के बीच समझ और सहयोग को बढ़ावा मिला। इस आयोजन ने भारतीय संस्कृति की विविधता और गहराई को जापानी दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया, जो लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

Sources

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