भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश: राज्यपाल ने पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ अभियोजन को दी मंजूरी

Edited By Anil Jangid, Updated: 09 Jan, 2026 07:08 PM

governor approves prosecution against former minister mahesh joshi in corruption

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा और निर्णायक कदम सामने आया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण...

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा और निर्णायक कदम सामने आया है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के पूर्व मंत्री महेश जोशी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत की गई है, जिससे अब उनके विरुद्ध सक्षम न्यायालय में मुकदमा चलाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

राजभवन से जारी आदेशों के अनुसार, राज्यपाल ने भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निर्णय लिया है। अभियोजन की यह स्वीकृति दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197(1) एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 218 के तहत दी गई है। पूर्व मंत्री महेश जोशी पर PMLA की धारा 3 और 4 के अंतर्गत गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जो जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं।

 

इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता, नैतिकता और जवाबदेही से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। राज्यपाल की इस स्वीकृति को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त और स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

 

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से जांच एजेंसियों को मजबूती मिलेगी और राजनीतिक प्रभाव या पद की आड़ में चल रहे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी। अब मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय में सभी साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों की गहन समीक्षा की जाएगी।

 

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय न केवल पूर्व मंत्री महेश जोशी के राजनीतिक भविष्य के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में सुशासन और कानून के शासन की दिशा में एक अहम मील का पत्थर भी है। यह स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

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