मकर संक्रांति पर सीएम भजनलाल का देसी अंदाज़, जलमहल पर पतंगबाजी कर दिया लोकसंस्कृति का संदेश

Edited By Anil Jangid, Updated: 14 Jan, 2026 01:44 PM

cm bhajanlal traditional style on makar sankranti kite flying

जयपुर। मकर संक्रांति का पर्व राजस्थान में परंपरा, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के साथ धूमधाम से मनाया गया। राजधानी जयपुर में पर्यटन विभाग की ओर से ऐतिहासिक जलमहल की पाल पर ‘काइट फेस्टिवल–2026’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने...

जयपुर। मकर संक्रांति का पर्व राजस्थान में परंपरा, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के साथ धूमधाम से मनाया गया। राजधानी जयपुर में पर्यटन विभाग की ओर से ऐतिहासिक जलमहल की पाल पर ‘काइट फेस्टिवल–2026’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शिरकत कर उत्सव की शोभा बढ़ाई। मुख्यमंत्री ने न केवल कार्यक्रम में भाग लिया, बल्कि स्वयं मांझा थामकर पतंगबाजी करते हुए लोक परंपरा से जुड़ाव का संदेश भी दिया।

 

पतंग, चरखी और मांझे के साथ दिखा मुख्यमंत्री का उत्साह
जलमहल की पाल पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का एक अलग ही देसी और आत्मीय अंदाज़ देखने को मिला। उन्होंने पूरे उत्साह के साथ चरखी संभाली और पतंग को कुशलता से आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाया। पतंग उड़ाते समय उनकी सधी हुई पकड़ और मांझे पर नियंत्रण किसी अनुभवी पतंगबाज की तरह नजर आया। कभी पतंग को ढील देना तो कभी तेज झटका देकर पेंच संभालना—मुख्यमंत्री हर पल आसमान पर नजर टिकाए दिखे।

 

डिप्टी सीएम दिया कुमारी और विधायक बालमुकुंद आचार्य भी हुए शामिल
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और विधायक बालमुकुंद आचार्य भी मुख्यमंत्री के साथ पतंगबाजी करते नजर आए। तीनों जनप्रतिनिधियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया। रंग-बिरंगी पतंगों से सजा जयपुर का आसमान पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।

 

पर्यटकों में दिखा खास उत्साह
कार्यक्रम में देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी पतंग महोत्सव का आनंद लिया। मुख्यमंत्री को पारंपरिक अंदाज में पतंग उड़ाते देख लोगों ने तालियों और उत्साह के साथ उनका अभिनंदन किया। काइट फेस्टिवल ने राजस्थान की लोकसंस्कृति और पर्यटन को एक नई पहचान दी।

 

सीएम ने दी मकर संक्रांति की शुभकामनाएं
पतंग उड़ाने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व परंपरा, एकता और उल्लास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं और पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं।

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