Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 21 Apr, 2026 07:15 PM

राजस्थान के Dungarpur में आदिवासी धर्म कोड को लेकर चल रही बहस के बीच विधायक प्रत्याशी Banshilal Katara का बयान चर्चा में आ गया है।
बयान से बढ़ी सियासी बहस
राजस्थान के Dungarpur में आदिवासी धर्म कोड को लेकर चल रही बहस के बीच विधायक प्रत्याशी Banshilal Katara का बयान चर्चा में आ गया है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए आदिवासी समाज को अलग पहचान देने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे समाज में भ्रम फैल रहा है।
“समाज को बांटने की कोशिश” का आरोप
कटारा ने अपने बयान में कहा कि आदिवासी समाज को अलग धर्म कोड के नाम पर हिंदू समाज से अलग बताने की कोशिश की जा रही है, जो समाज की एकता के खिलाफ है।
उन्होंने इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताते हुए कहा कि इससे सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
आदिवासी पहचान बनाम धार्मिक पहचान
इस मुद्दे पर दो तरह की राय सामने आ रही है:
- एक पक्ष आदिवासी समाज को अलग धार्मिक पहचान देने की मांग कर रहा है
- दूसरा पक्ष इसे सनातन परंपरा का हिस्सा मानता है
कटारा का कहना है कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है और सनातन परंपरा में भी प्रकृति पूजा का विशेष महत्व रहा है।
संविधान और इतिहास का हवाला
अपने बयान में उन्होंने B. R. Ambedkar के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि समाज को विभाजित करने वाली सोच संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने इसे ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ बताते हुए समाज को एकजुट रहने की अपील की।
बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक विवाद
आदिवासी धर्म कोड का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है और अलग-अलग राज्यों में इस पर आंदोलन भी हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है।
एकता बनाए रखने की अपील
कटारा ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या विभाजनकारी बातों से दूर रहें और समाज की एकता और अखंडता बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।