15 जून को समाप्त होगा अधिकमास, 19 जून से फिर बैंड-बाजा-बरात

Edited By Anil Jangid, Updated: 12 Jun, 2026 07:45 PM

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पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि अधिकमास 15 जून को समाप्त होगा। इसके तीन दिन बाद 19 जून से विवाह मुहूर्त प्रारंभ हो जाएंगे।

जयपुर। पुरुषोत्तम मास की समाप्ति के साथ ही अब विवाह-शादी का मौसम शुरू होने जा रहा है। लंबे समय से शुभ कार्यों पर लगी विराम की स्थिति अब खत्म होगी और घर-आंगन में एक बार फिर शहनाई की मधुर गूंज सुनाई देगी। मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, इसलिए इस माह के समाप्त होते ही लोग शुभ मुहूर्त का इंतजार करते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि अधिकमास 15 जून को समाप्त होगा। इसके तीन दिन बाद 19 जून से विवाह मुहूर्त प्रारंभ हो जाएंगे। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 19 जून से 12 जुलाई 2026 तक केवल 23 दिनों की अवधि में 18 शुभ विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। जिसके चलते चार महीने तक विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) की समाप्ति के साथ ही विवाह योग्य परिवारों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। 15 जून को अधिकमास समाप्त होते ही मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी और 19 जून से एक बार फिर शादी-विवाह का शुभ दौर शुरू हो जाएगा। 15 जुलाई से ही ग्रहों की बदलती चाल और 18 जुलाई को देवगुरु बृहस्पति का तारा अस्त होने के कारण सभी शुभ कार्यों पर धार्मिक रूप से स्वतः ही विराम लग जाएगा। ऐसे में 12 जुलाई को इस सीजन का आखिरी पंचांगीय सावा संपन्न होगा।

15 जून को खत्म होगा अधिकमास
हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकमास या पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।  इस अवधि में पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है।  लेकिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। इस वर्ष अधिकमास 15 जून को समाप्त हो रहा है। इसके बाद शुभ कार्यों के लिए रास्ते खुल जाएंगे।

19 जून से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त
अधिकमास समाप्त होने के तीन दिन बाद 19 जून से विवाह मुहूर्त प्रारंभ होंगे। 19 जून से 12 जुलाई तक कुल 18 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। जिनमें विवाह संस्कार संपन्न किए जा सकते हैं।  यही कारण है कि परिवारों ने अभी से तैयारियां तेज कर दी हैं।

22 जुलाई भडल्या नवमी पर 'अबूझ सावा' 
इस पूरे सीजन में सबसे बड़ी राहत और उत्सुकता 22 जुलाई को आने वाली 'भडल्या नवमी' को लेकर है। इस दिन को सनातन परंपरा में 'अबूझ सावा' माना गया है। अबूझ सावे का अर्थ है कि जिन जातकों के विवाह के लिए कोई व्यक्तिगत या शुद्ध मुहूर्त नहीं निकल पा रहा है, वे भी इस दिन बिना किसी संकोच के फेरे ले सकते हैं। 

25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास
विवाह मुहूतों के इस दौर के बाद 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा, जो 21 नवंबर तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते है और पाताललोक में विश्राम करतेहै। इसी कारण चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अधिकांश मांगलिक कार्य नहीं कार्य नहीं किए जाते। चातुर्मास समाप्त होने के बाद ही पुनः मांगलिक कार्यों के आयोजन शुरू होंगे।

विवाह का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है। इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है। विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं। हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है।

वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त
जून 2026 – 19, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 जून 
जुलाई 2026 - 1, 3, 4, 6, 7, 8, 9, 11, 12 जुलाई 
नवंबर 2026 - 21, 24, 25 और 26 नवंबर 
दिसंबर 2026 -2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 दिसंबर 
 ( कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट बढ़ सकती है और परिवर्तन हो सकता है। )

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