Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Aug, 2026 01:42 PM
जयपुर। हरियाली अमावस्या के दिन 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना कई देशों में पूर्ण और आंशिक रूप से दिखाई देगी, जबकि भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण की घटना को हमेशा से खगोल विज्ञान और धार्मिक...
जयपुर। हरियाली अमावस्या के दिन 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना कई देशों में पूर्ण और आंशिक रूप से दिखाई देगी, जबकि भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण की घटना को हमेशा से खगोल विज्ञान और धार्मिक नजरिए से खास माना जाता रहा है। 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इससे पहले साल का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी के महीने में लगा था। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह सूर्य ग्रहण श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगेगा। यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा जहां पर गुरु भी मौजूद होंगे। भारत को छोड़कर उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन में दिखाई देगा।
12 अगस्त 2026 को दूसरा सूर्य ग्रहण
साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। इस सूर्य ग्रहण की शुरुआत रात करीब 09:04 मिनट से होगी जिसका समापन 13 अगस्त को सुबह 04:25 मिनट पर होगा। दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। यहां के लोग पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा देख सकेंगे। यहां दिन में कुछ समय के लिए पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा। वहीं उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इस दिन आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा।
बिना किसी बाधा के मनाएं त्यौहार
भारत में अदृश्य ग्रहण का धार्मिक कर्मकांडों पर प्रभाव नहीं माना जाता। इसलिए हरियाली अमावस्या पर स्नान, दान, पितृ तर्पण, वृक्षारोपण और शिव पूजा सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से होंगे।
वलयाकार सूर्य ग्रहण
12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। यह ग्रहण काफी लंबा चलेगा।
कब लगेगा सूर्य ग्रहण
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि यानी 12 अगस्त 2026 को लगेगा। यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इसकी शुरुआत 12 अगस्त की रात 9:04 मिनट से होगी और इसका समापन 13 अगस्त की सुबह 4:25 मिनट पर होगा। ज्योतिष के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में घटित होगा।
कर्क राशि में लगेगा सूर्य ग्रहण
पंचांग गणना के अनुसार साल का यह दूसरा सूर्य ग्रहण कर्क राशि में रहेगा। इस दौरान सूर्य कर्क राशि में संचरण कर रहे होंगे। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं और इस दौरान देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में मौजूद होंगे। कर्क राशि में देवगुरु बृहस्पति उच्च के होते हैं। वहीं अगर नक्षत्र की बात करे तो सूर्य ग्रहण के दौरान अश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
कब लगता है सूर्य ग्रहण
हिंदू धर्म में ग्रहण की घटना को बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है। सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी तीनों ही एक लाइन में आ जाते हैं यानी सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है। ऐसे में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है। 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। जिसमें सूर्य रिंग ऑफ फायर के रूप में दिखाई देगा।
भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण
साल 2026 का यह दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा क्योंकि ग्रहण भारतीय समयानुसार रात में शुरू होगा जिसके कारण इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
मान्य नहीं होगा सूतक काल
हिंदू धर्म में ग्रहण की घटना को अशुभ माना जाता है। ग्रहण के लगने के कुछ घंटों पहले तक सूतक काल शुरू हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य ग्रहण लगता है तो उसके आरंभ होने के करीब 12 घंटे पहले से सूतक काल लग जाता है। सूतक काल के समय को अच्छा नहीं माना जाता है। सूतक में किसी भी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। पूजा-पाठ करना वर्जित होता है। यह सूतककाल ग्रहण के समापन तक चलता है। ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करके दोबारा से मंदिर खोला जाता है। लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा जिसके कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कहां-कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण
भारत में रात होने की वजह से साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा। इस वलयाकार सूर्य ग्रहण को यूरोप के कई देशों अटलांटिक महासागर और रूस के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। साल 2026 में लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण यूरोप के लिए बेहद खास है। यह 100 साल से भी ज्यादा समय बाद स्पेन की मुख्य भूमि से नजर आने वाला पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। उत्तरी स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और पुर्तगाल कुछ इलाकों में पूर्ण सूर्य ग्रहण नजर आएगा। यहां पर चंद्रमा कुछ समय के लिए सूरज को ढक लेगा। इस दौरान आसमान में अंधेरा छा जाएगा। यूरोप के बाकी जगहों, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा।
प्राकृतिक आपदाओं की आशंका
सूर्य ग्रहण की वजह से प्राकृतिक आपदाओं का समय से ज्यादा प्रकोप देखने को मिलेगा। इसमें भूकंप, बाढ़, सुनामी, विमान दुर्घटनाएं का संकेत मिल रहे हैं। जल तत्व की राशि कर्क में पड़ने वाले सूर्य ग्रहण के तुरंत बाद आसामान्य वर्षा और भूकंपन के योग बनेंगे। कर्क राशि में ग्रहण के चलते भारत के मध्य भाग में और दक्षिण-पूर्व के कई राज्यों में अत्यधिक भारी वर्षा के बाद बाढ़ आ सकती है। यूरोप के कई देशों जैसे फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इंग्लैंड, जर्मनी आदि में असामान्य वर्षा का योग बन रहा है। तेलंगना और आँध्रप्रदेश में अच्छी वर्षा होगी। कुंछ विवादित मामले, महिला अपराध और देश के कई हिस्सों में छात्र आंदोलन केंद्र सरकार को कुछ कठिनाई में ला सकती हैं। प्राकृतिक आपदा में जनहानि कम ही होने की संभावना है। फिल्म एवं राजनीति से दुखद समाचार। व्यापार में तेजी आएगी। बीमारियों में कमी आएगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। वायुयान दुर्घटना होने की संभावना। पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा। आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, उपद्रव और आगजनी की स्थितियां बन सकती है।