Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Aug, 2026 03:45 PM
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल का दूसरा सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त महीने में लगेगा। इस दौरान सावन का महीना रहने वाला है।
जयपुर। 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर खग्रास सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगा था, जबकि इसी साल पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगा था। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल का दूसरा सूर्य और चंद्र ग्रहण अगस्त महीने में लगेगा। इस दौरान सावन का महीना रहने वाला है। अगस्त महीने में सबसे पहले सूर्य ग्रहण और फिर चंद्र ग्रहण लगेगा। दोनों ग्रहण 15 दिन के अंतराल में होगा। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा। उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन में दिखाई देगा। लेकिन भारत में यह नजर नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। साल का दूसरा चंद्र ग्रहण शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, लेकिन भारत में यह नजर नहीं आएगा, इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
श्रावण में इस वर्ष एक ही पक्ष में दो ग्रहण की दुर्लभ खगोलीय घटना का संयोग बनने जा रहा है। एक ही पक्ष (पखवाड़े) में सूर्य और चंद्र ग्रहण का होना खगोल विज्ञान की दृष्टि से विशेष घटना है, लेकिन राहत की बात यह है कि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। इसलिए इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और श्रद्धालु हरियाली अमावस्या तथा रक्षाबंधन के पर्व पूरे धार्मिक उत्साह और विधि-विधान से मना सकेंगे।
धर्मशास्त्रों के अनुसार ग्रहण का सूतक तभी माना जाता है, जब ग्रहण संबंधित क्षेत्र में दृश्य हो। चूंकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए मंदिरों के पट बंद करने, पूजा-अर्चना रोकने या धार्मिक अनुष्ठानों में किसी प्रकार का परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
12 अगस्त 2026 को लगेगा सूर्य ग्रहण
दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। यहां के लोग पूर्ण सूर्य ग्रहण का नजारा देख सकेंगे। यहां दिन में कुछ समय के लिए पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा। वहीं उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इस दिन आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा।
28 अगस्त 2026 को लगेगा चंद्र ग्रहण
वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। लेकिन भारत में यह नजर नहीं आएगा। इसलिए यहां इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
बिना किसी बाधा के मनाएं त्यौहार
भारत में अदृश्य ग्रहण का धार्मिक कर्मकांडों पर प्रभाव नहीं माना जाता। इसलिए हरियाली अमावस्या पर स्नान, दान, पितृ तर्पण, वृक्षारोपण और शिव पूजा सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से होंगे। इसी तरह रक्षाबंधन पर राखी बांधने, श्रावणी उपाकर्म, यज्ञोपवीत संस्कार और पूर्णिमा पूजन भी बिना किसी बाधा के संपन्न होंगे।
बृहत्संहिता के अनुसार दो ग्रहणों का असर
वराहमिहिर द्वारा रचित ग्रंथ बृहत्संहिता के राहुचाराध्याय में लिखा है कि जब दो-दो ग्रहण एक साथ एक ही महीने में होते हैं तो तूफान, भूकंप, मानवीय भूल से बड़ी संख्या में जनहानि होने के योग बनते हैं। एक ही महीने में सूर्य और चंद्र ग्रहण होते हैं तो सेनाओं की हलचल बढ़ती है। सरकारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक आपदा आने के योग रहते हैं।
ग्रहण योग का पड़ेगा व्यापक प्रभाव
विश्व के नजरिए से देखा जाए तो इस दौरान ग्रहों के प्रभाव से दो राष्ट्रों के मध्य तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। राष्ट्र अध्यक्षों के मध्य वाक् युद्ध की स्थिति बन सकती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के दृष्टिकोण से बड़ी नकारात्मक सूचना प्राप्त हो सकती है। लेकिन पद प्रतिष्ठा के लिए यह समय महिलाओं के लिए ठीक है। बौद्धिकता , नए अन्वेषण, व्यापारिक दृष्टिकोण से यह अवधि शुभ फल प्रदायक साबित होगा । ग्रहण से तीन महीने तक की अवधि में आम जनमानस के स्वास्थ्य में अवरोध, सुख में कमी ,नए रोगों का उत्पन्न होना , नए रोगों के आने से या होने से सुख में कमी होना ,आपसी मतभेद मनमुटाव, राजनीतिक दलों में कटुता का भाव। बड़े वाहन की दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। भारतीय रुपए का ह्रास हो सकता है। व्यापारिक दृष्टिकोण से यह समय ठीक रहेगा। आर्थिक दृष्टिकोण से समय ठीक रहेगा एवं बौद्धिक दृष्टिकोण से भी यह समय उपयुक्त रहेगा।
शुभ-अशुभ प्रभाव
2 ग्रहणों की वजह से प्राकृतिक आपदाओं का समय से ज्यादा प्रकोप देखने को मिलेगा। इसमें भूकंप, बाढ़, सुनामी, विमान दुर्घटनाएं का संकेत मिल रहे हैं। प्राकृतिक आपदा में जनहानि कम ही होने की संभावना है। देशों के बीच युद्ध होगा। आतंकवाद का सफाया होगा। सेना की हलचल बढ़ेगी। प्राकृतिक आपदा के साथ अग्नि कांड भूकंप गैस दुर्घटना वायुयान दुर्घटना, महामारी , दुर्घटना, राजनीतिक उठापटक, जातिवाद, धार्मिक उन्माद होने की संभावना। विश्व में कुछ हिस्सों में हवा के साथ बारिश रहेगी। भूकंप या अन्य तरह से प्राकृतिक आपदा आने की भी आशंका है। जनजीवन सामान्य होगा। माैसम भी बदलेगा और बारिश भी अच्छी हाेगी। विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा। खाने की चीजों की कीमतें सामान्य रहेंगी। दुर्घटनाएं आगजनी आतंक और तनाव होने की संभावना। आंदोलन धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, वायुयान दुर्घटना, विमान में खराबी, शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। मनोरंजन फिल्म खेलकूद एवं गायन क्षेत्र से बुरी खबर मिलेगी। बड़े नेताओं का दुखद समाचार मिलने की संभावना। आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, उपद्रव और आगजनी की स्थितियां बन सकती है।
करें पूजा-पाठ और दान
ग्रहण के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए।