मई में होगा भक्ति और आस्था का संगम, वैशाख पूर्णिमा से वट सावित्री तक होंगे व्रत और त्योहार

Edited By Anil Jangid, Updated: 01 May, 2026 03:54 PM

may to witness a confluence of devotion and faith

श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि मई 2026 का महीना खगोलीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प रहने वाला है।

जयपुर। मई के इस महीने में ज्येष्ठ अधिकमास की शुरुआत होने जा रही है। इस दौरान शुभ मांगलिक कार्यों को करना वर्जित माना जाता है। वहीं, इसी माह में वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। महीने की शुरुआत बुद्ध पूर्णिमा से होगी। मई का महीना धार्मिक आस्था, व्रत-पूजा और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ ग्रह गोचर के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान एक ओर जहां कई प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ते हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रहों की स्थिति में होने वाले बदलाव भी जीवन पर विशेष प्रभाव डालते हैं। यही कारण है कि ज्योतिष और धर्म दोनों ही दृष्टिकोणों से यह महीना खास बन जाता है। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि मई 2026 का महीना खगोलीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प रहने वाला है। ग्रहों के गोचर की शुरुआत 11 मई से होगी, जब मंगल मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 14 मई को शुक्र मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। 15 मई को सूर्य वृषभ राशि में आएंगे और उसी दिन बुध भी वृषभ में प्रवेश करेंगे।  महीने के अंत में 29 मई को बुध मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इस दौरान शनि, गुरु, राहु और केतु अपनी वर्तमान स्थिति में स्थिर रहेंगे, जबकि चंद्रमा हर ढाई दिन में राशि बदलते रहेंगे। इस महीने की शुरुआत बुद्ध पूर्णिमा से होगी, जो ज्ञान और करुणा का संदेश देती है। इसके बाद मध्य में आने वाली शनि जयंती कर्म और न्याय के देवता शनि देव की उपासना के लिए महत्वपूर्ण है, वहीं  अंत में गंगा दशहरा के रूप में मां गंगा के अवतरण का पावन पर्व मनाया जाएगा। इसके अलावा  हनुमान जयंती भी इसी महीने में आती है जो शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक है।

 

मई 2026 में होने वाले इन गोचर परिवर्तनों का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग होगा और यह समय विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव, अवसर और चुनौतियां लेकर आ सकता है। कुछ ग्रहों का गोचर शिक्षा, विवाह, धार्मिक कार्यों, और आध्यात्मिकता से संबंधित विषयों पर प्रभाव डाल सकता है, वहीं कुछ का असर संचार, व्यापार और व्यक्तिगत संबंधों पर हो सकता है। इस महीने के ग्रहों के गोचर का प्रभाव जानना आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है ताकि आप अपनी योजनाओं को बेहतर तरीके से बना सकें और इस समय का अधिकतम लाभ उठा सकें। साल 2026 का पांचवां महीना शुरू होने वाला है। इस माह में कई महत्वपूर्ण दिन पड़ेंगे। बुद्ध पूर्णिमा, ज्येष्ठ अधिकमास, वट सावित्री व्रत जैसे कई प्रमुख व्रत और त्योहार मई के महीने में आने वाले हैं। इन पर्व का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व बताया गया है। साथ ही, इस दौरान अपरा एकादशी और पद्मिनी एकादशी का व्रत भी किया जाएगा। मान्यता है कि एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में भी इन तिथियों को बहुत पुण्यकारी माना गया है। 

 

मई के प्रमुख व्रत-त्योहार 
तिथि     व्रत-त्योहार
2 मई    नारद जयंती, ज्येष्ठ माह का आरंभ
5 मई    एकदन्त संकष्टी, पहला बड़ा मंगल
9 मई    कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
12 मई    हनुमान जयन्ती, दूसरा बड़ा मंगल
13 मई    कृष्ण परशुराम द्वादशी, अपरा एकादशी
14 मई    अपरा एकादशी पारण, गुरु प्रदोष व्रत
15 मई    वृषभ संक्रान्ति, मासिक शिवरात्रि
16 मई    वट सावित्री व्रत, शनि जयन्ती, मासिक कार्तिगाई, दर्श अमावस्या
18 मई    रोहिणी व्रत
19 मई    तीसरा बड़ा मंगल
20 मई    वरद चतुर्थी
21 मई    अधिक स्कन्द षष्ठी
23 मई    अधिक मासिक दुर्गाष्टमी
25 मई    गंगा दशहरा
26 मई    चौथा बड़ा मंगल
27 मई    अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी, पद्मिनी एकादशी
28 मई    गुरु प्रदोष व्रत
31 मई    ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा

 

वैशाख बुद्ध पूर्णिमा
हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का बहुत खास महत्व है। वैशाख मास में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि को वैशाख बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इसे बौद्ध धर्म में भी अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा पर महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। साथ ही, इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान बताया गया है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा 1 मई, शुक्रवार के दिन पड़ रही है।

 

नारद जयंती
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर नारद जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 2 मई, शनिवार के दिन पड़ रही है। ब्रह्माजी के 17 मानस पुत्रों में से एक नारद मुनि को दुनिया का पहला पत्रकार भी माना जाता है। कहते हैं कि इसी तिथि पर नारदजी का प्राकट्य हुआ था। नारद पुराण में कलियुग को लेकर भी बहुत कुछ बताया गया है।

 

अपरा एकादशी
हिंदू धर्म में एकादशी का खास महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का खास महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस बार 13 मई बुधवार के दिन अपरा एकादशी का व्रत किया जाएगा।

 

गुरु प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में खास महत्व है। हर महीने के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में प्रदोष व्रत किया जाता है। मई के महीने में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 मई, गुरुवार के दिन पड़ रही है। ऐसे में इसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि अगर गुरुवार को यह व्रत पड़े तो इसे गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है।

 

शनि जयंती
ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 16, मई शनिवार के दिन पड़ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन शनिदेव का प्राकट्य हुआ था। ऐसे में शनि जयंती पर शनिदेव की विधि-विधान से पूजा व आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है।

 

वट सावित्री व्रत
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का बहुत खास महत्व है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए रखती हैं। वट सावित्री का व्रत हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर किया जाता है। जो इस बार 16, मई शनिवार के दिन पड़ रही है। साथ ही, इस दिन शनि जयंती का संयोग भी बन रहा है।

 

ज्येष्ठ अधिकमास
मान्यता है कि जिस चंद्र महीने में सूर्य संक्रांति नहीं होती उसे पुरुषोत्तम मास, मलमास या अधिकमास के नाम से जाना जाता है। इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार शुभ व मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। हालांकि, इस दौरान ध्यान, दान पुण्य आदि के कार्य करना शुभ माना जाता है। इस बार 17 मई, रविवार के दिन से ज्येष्ठ अधिकमास की शुरुआत हो रही है।

 

गंगा दशहरा
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 25 मई, सोमवार के दिन पड़ रही है। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। ऐसे में गंगा दशहरा पर मां गंगा की पूजा का खास महत्व बताया गया है। ऐसा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

 

पद्मिनी एकादशी
हिंदू धर्म में पद्मिनी एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। पुरुषोत्तम मास की इस एकादशी को कमला एकादशी और पद्मिनी एकादशी के नाम से जाता है। इसका व्रत इस बार ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाएगा। जो 26 मई, मंगलवार के दिन पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

 

गुरु प्रदोष व्रत
हर माह के कृष्ण और शुक्ल की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत पड़ता है। मई महीने में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 28 मई, गुरुवार के दिन पड़ रही है। ऐसे में इसी दिन प्रदोष व्रत किया जाएगा। गुरुवार के दिन त्रयोदशी तिथि लगने से इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन शिवजी की पूजा करना बेहद शुभ फलदायी माना जाता है।

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