Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Apr, 2026 04:34 PM

श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि बैसाखी के त्योहार तक रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है। ऐसे में किसान फसलों कि कटाई की खुशी में बैसाखी धूमधाम से मनाते हैं।
सूर्यदेव के मेष राशि में प्रवेश करने पर बैसाखी मनाई जाती है। इसे मेष संक्रांति और वैशाख संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सूर्य देवता की स्तुति और दान का खास महत्व होता है। वहीं किसान बैसाखी फसलों की कटाई की खुशी में मनाते हैं। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि बैसाखी के त्योहार तक रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है। ऐसे में किसान फसलों कि कटाई की खुशी में बैसाखी धूमधाम से मनाते हैं। वहीं, इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं जिसके चलते यह दिन सूर्यदेव की स्तुति करने के लिए बेहद विशेष माना जाता है। बैसाखी को वैशाख संक्रांति और मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य देवता को ग्रहों का राजा बताया गया है। ऐसे में जब वो अपनी राशि बदलते हैं, तो इसका प्रभाव हर किसी पर देखने को मिलता है। यही कारण है कि बैसाखी को नया साल भी माना जाता है।
इसे फसल का पर्व भी माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि जब फसल पककर तैयार हो जाती है तब ख़ुशी मनाने के रूप में बैसाखी मनाई जाती है। मुख्य रूप से यह पर्व पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है। इस दौरान एक खास रबी की फसल पककर तैयार होती है और उसी की खुशी मनाने के लिए लोग बैसाखी में नाचते, गाते हैं और खुशियां मनाते हैं। अगर हम सूर्य पंचांग की बात करें तो बैसाखी को सिख नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है। बैसाखी सिख समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इसका धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी बहुत ज्यादा है। यह दिन आने वाले साल के लिए नए मौसम और नई शुरुआत का प्रतीक होता है। इस दिन लोग एक साथ इकठ्ठा होते हैं और अच्छी फसल के साथ अच्छी फसल की कामना करते हुए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।
बैसाखी का पर्व नए सौर वर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। हर साल 13 या 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाता है। इसी दिन बैसाखी का त्योहार भी मनाया जाता है। इस साल 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे और इसी दिन सिखों का पर्व बैसाखी भी मनाया जाएगा।
बैसाखी 2026
पंचांग के अनुसार इस साल बैसाखी का त्योहार 14 अप्रैल, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि लग रही है। 14 अप्रैल को सुबह 9:31 मिनट पर सूर्यदेव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में बैसाखी का त्योहार 14 तारीख को ही मनाया जाएगा। इस दिन पुण्य काल की तिथि सूर्योदय से लेकर शाम को 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगी।
बैसाखी, मेष संक्रांति - मंगलवार 14 अप्रैल
सूर्य गोचर मेष राशि में - 14 अप्रैल को सुबह 9:31 मिनट पर।
मेष संक्रांति का प्रभाव
वारानुसार और नक्षत्रानुसार यह महोदरी नामक संक्रांति होगी। ऐसे में सोना और चांदी की कीमतें बढ़ती हुई देखने को मिल सकती हैं। साथ ही, मंगलवारी संक्रांति होने के चलते तेल, घी, वनस्पति और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी महंगी होने की आशंका है। इसके चलते सामान्य लोगों की परेशानियों में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, कुछ राज्यों में राजनीति के क्षेत्र में उठा-पटक देखी जा सकती है।
वैशाख संक्रांति का महत्व
इस दिन सूर्य देवता की पूजा की जाती है। साथ ही, किसान फसलों की कटाई की खुशी में बैसाखी का त्योहार मनाते हैं। वैशाख संक्रांति पर स्नान-दान का भी खास महत्व होता है। मान्यता है कि इससे शुभ फल प्राप्त होता है। सूर्य देवता को ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों का राजा माना गया है। ऐसे में सूर्य के राशि परिवर्तन करने से इसका प्रभाव सभी पर देखने को मिलता है। बैसाखी को इसीलिए नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। किसान मकर संक्रांति से फसलों की कटाई शुरू कर देते हैं। इस दिन सूर्य देव की पूजा करना बहुत शुभ फलदायी माना जाता है। इस दिन दिवाली के प्रकार ही लोग अपने घर की सफाई करते हैं और आंगन में रंगोली बनाते हैं। बैसाखी के त्योहार पर कई प्रकार के पकवान भी बनाए जाते हैं और सिख समुदाय के लोग सुबह के समय गुरुद्वारे जाते हैं। इस दिन कई स्थानों पर मेला भी लगता है और अपने घरों को लाइटों से सजा दिया जाता है।