Edited By Anil Jangid, Updated: 04 Apr, 2026 08:01 PM

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि 5 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत करने का भी विधान है।
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना गया है। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से जीवन के कठिन से कठिन संकट दूर हो जाते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि 5 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत करने का भी विधान है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहती है। प्रत्येक महीने के कृष्ण और शुक्ल और दोनों पक्षों की चतुर्थी को भगवान गणेश की विधान है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी श्री गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। हर महीने में आने वाली संकष्टी और विनायक गणेश चतुर्थी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आने वाली संकष्टी चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने रखा जाता है, लेकिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व होता है, जिसे विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनकी कृपा शुभ-मांगलिक कार्यों में आ रही बाधाएं दूर करती हैं। साथ ही व्यक्ति को सफलता भी मिलती हैं। लेकिन गणेश जी का विशेष आशीर्वाद पाने के लिए विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत बेहद प्रभावशाली माना जाता है। पंचांग के अनुसार, हर साल वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विकट संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश का विशेष रूप से पूजन किया जाता है, जिससे जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। यही नहीं साधक को कठिन परिस्थितियों से मुक्ति भी प्राप्त होती हैं।
शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 5 अप्रैल 2026 को सुबह 11:59 मिनट पर होगा। चतुर्थी तिथि का समापन 6 अप्रैल को दोपहर 2:10 मिनट पर होगा। उदयातिथि और चंद्रोदय के मुताबिक, 5 अप्रैल 2026 को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
चंद्रोदय का समय
विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय का समय रात 9:54 मिनट पर रहेगा। आपको बता दें कि संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण चंद्रोदय के समय ही किया जाता है।
विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत महत्व
भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक विकट रूप भी है। समस्त प्रकार के ज्ञात-अज्ञात भय, रोग, शोक एवं दुर्घटनाओं से मुक्ति हेतु भगवान विकट की पूजा की जाती है। भगवान विकट अपने भक्तों को अपराजेयता एवं निर्भयता प्रदान करते हैं और घोर से घोर महासंकटों में भक्तों की रक्षा करते हैं।
व्रत से जुड़े नियम
व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल या पीले वस्त्र धारण करें। भगवान गणेश के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। दिन भर सात्विक रहें और क्रोध या अपशब्दों से बचें। सूर्यास्त के बाद गणेश जी की मूर्ति को लाल कपड़े पर स्थापित करें। उन्हें सिंदूर, अक्षत, फूल और 21 दूर्वा चढ़ाएं। बप्पा को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। रात में जब चंद्रमा उदय हो, तब चांदी के पात्र या लोटे में दूध, जल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद ही व्रत का पारण करें। पूजा का समापन आरती से करें। पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
पूजन मंत्र
ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय।।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देवा, सर्व कार्येषु सर्वदा।।
ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे, प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे, निधीनां त्वा निधिपतिं हवामहे।।
ॐ वक्रतुण्डाय हुम्॥
ॐ गं गणपतये नमः॥