अजमेर: 5 रुपये में कपड़े प्रेस करने वाले धोबी ने किया 598 करोड़ का ट्रांजेक्शन? मिला IT का नोटिस

Edited By Anil Jangid, Updated: 09 Apr, 2026 05:18 PM

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अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले से एक अजीब और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक साधारण धोबी पर 598 करोड़ रुपये का लेन-देन करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला अजमेर के राम नगर इलाके का है, जहां जितेंद्र बाड़ोलिया नामक व्यक्ति सड़क पर फुटपाथ पर...

अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले से एक अजीब और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक साधारण धोबी पर 598 करोड़ रुपये का लेन-देन करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला अजमेर के राम नगर इलाके का है, जहां जितेंद्र बाड़ोलिया नामक व्यक्ति सड़क पर फुटपाथ पर ठेले पर बैठकर कपड़े प्रेस करता है और महज पांच रुपये में अपनी सेवाएं प्रदान करता है।

 

जितेंद्र को तब बड़ा झटका लगा जब इनकम टैक्स विभाग ने उसे 598 करोड़ 50 लाख 37 हजार 726 रुपये का डिमांड नोटिस भेजा। जब जितेंद्र ने यह नोटिस देखा, तो वह हक्के-बक्के रह गए, क्योंकि उनका इससे कोई वास्ता नहीं था। उन्होंने पूरी तरह से यह समझने की कोशिश की कि उनके नाम पर इतना बड़ा लेन-देन कैसे हो सकता है।

 

जांच में यह पता चला कि जितेंद्र के नाम पर हीरे-जवाहरात के कारोबार से संबंधित भारी-भरकम ट्रांजेक्शन दर्ज हैं, लेकिन असल में उनका इस कारोबार से कोई संबंध नहीं था। जितेंद्र केवल कपड़े प्रेस करके अपने परिवार का पेट पालते हैं।

 

शुरुआत में यह सामने आया कि करीब दो साल पहले जितेंद्र का पैन कार्ड और आधार कार्ड खो गया था। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों का दुरुपयोग कर किसी ने उनके नाम पर बैंक खाते खोले, जीएसटी नंबर जारी किया और फर्जी फर्म के जरिए करोड़ों का लेनदेन किया। खासकर गुजरात के सूरत में एक फर्जी कंपनी बनाकर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया।

 

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है, और पुलिस मामले की जांच कर रही है। इनकम टैक्स विभाग ने बैंक अधिकारियों से जवाब तलब किया है कि इतने बड़े ट्रांजेक्शन के बावजूद अलर्ट क्यों नहीं जारी किया गया।

 

यह घटना बैंकिंग सिस्टम और पहचान दस्तावेजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है। जितेंद्र बाड़ोलिया अब मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं, क्योंकि उन्हें अपने बेगुनाह होने को साबित करने के लिए दफ्तरों और थानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

 

यह मामला न केवल एक व्यक्ति की परेशानियों का कारण बना है, बल्कि यह हमारी पहचान की सुरक्षा में लापरवाही के गंभीर परिणामों की ओर भी इशारा करता है।

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