पहाड़ों में विराजमान है 1200 साल पुराना बादर माता मंदिर, निसंतान महिलाओं को मांगने पर देती संतान

Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Jan, 2026 06:52 PM

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अजमेर। अजमेर जिले के पुष्कर से करीब 5 किलोमीटर दूर कानस और होकरा गांव के बीच पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध बादर माता मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बना हुआ है। लगभग 1200 वर्ष पुराने इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से गंभीर...

अजमेर। अजमेर जिले के पुष्कर से करीब 5 किलोमीटर दूर कानस और होकरा गांव के बीच पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध बादर माता मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रतीक बना हुआ है। लगभग 1200 वर्ष पुराने इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है और संतानहीन महिलाओं को संतान सुख प्राप्त होता है।

 

मंदिर के पुजारी राजू रावत पिछले 30 वर्षों से नियमित रूप से माता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज भी पीढ़ियों से यहां पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कुंड का जल वर्षभर भरा रहता है, जिसे श्रद्धालु चमत्कारी मानते हैं। मान्यता है कि इस जल के उपयोग से चर्म रोग सहित कई बीमारियों में लाभ मिलता है।

 

ग्रामीणों के अनुसार, प्राचीन काल में जब गांव में चोरी और असुरक्षा का भय रहता था, तब माता की कृपा से पहले ही संकेत मिल जाते थे और गांव सुरक्षित रहता था। आज भी यहां अनेक चमत्कारों की कहानियां प्रचलित हैं। हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

 

भक्त गुमानी देवी ने बताया कि संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर वे प्रसादी चढ़ाने आई हैं, वहीं मनीष कुमावत ने माता की कृपा से पारिवारिक समस्याओं के समाधान की बात कही।

 

पहाड़ों की गोद में बसा यह मंदिर आज भी श्रद्धा, विश्वास और आस्था का अनुपम केंद्र बनकर भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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