Edited By LUCKY SHARMA, Updated: 04 Aug, 2026 06:01 PM

मंत्री बाबूलाल खराड़ी बोले- अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा, ब्रेन डेड व्यक्ति के अंग 8 गंभीर मरीजों को दे सकते हैं नया जीवन
उदयपुर। राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर रवीन्द्र नाथ टैगोर आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय में सोमवार को अंगदान को लेकर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी मुख्य अतिथि और उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधायक ताराचंद जैन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने अंगदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक ब्रेन डेड व्यक्ति अपने अंगों के माध्यम से आठ गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन दे सकता है।
'अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा'
मुख्य अतिथि बाबूलाल खराड़ी ने भारतीय संस्कृति में त्याग और मानव सेवा की परंपरा का उल्लेख करते हुए महर्षि दधीचि का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है।
उन्होंने कहा कि समाज में अंगदान को लेकर मौजूद भ्रांतियों को दूर करने और प्रत्येक नागरिक को इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अंगदान के प्रति जागरूक होकर इस नेक पहल में भागीदारी निभाने की अपील की।
चिकित्सकों और सहयोगियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान अंगदान जागरूकता अभियान और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले चिकित्सकों, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर्स और सहयोगियों को प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया।
नोडल ऑफिसर डॉ. तरुण रलोत ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज की ओर से अंगदान जागरूकता के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों, जन-जागरूकता अभियानों और शपथ अभियान की जानकारी दी। उन्होंने ब्रेन डेथ के वैज्ञानिक पहलुओं, अंगदान की कानूनी प्रक्रिया और गंभीर मरीजों के लिए अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता को सरल भाषा में समझाया।
100 से अधिक चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने ली शपथ
राष्ट्रीय अंगदान दिवस के अवसर पर नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े 100 से अधिक चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों ने अंगदान की शपथ ली। इस दौरान उन्होंने समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।
अंगदान करने वाले परिवारों का सम्मान
कार्यक्रम में पूर्व में अंगदान करने वाले स्वर्गीय कान सिंह और अंगदान की सहमति देने वाले स्वर्गीय कांतिलाल जोशी के परिजनों को अतिथियों ने शॉल ओढ़ाकर, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
अतिथियों ने दोनों परिवारों के निर्णय को समाज के लिए अनुकरणीय बताते हुए अन्य परिवारों से भी अंगदान के प्रति जागरूक होने और इस मानवीय पहल से जुड़ने की अपील की।