सिरोही के निमतलाई के सरकारी विधालय में घुस रहा गांव का गंदा पानी, जर्जर बिल्डिंग में ऊपर से टपक रहा पानी

Edited By Kailash Singh, Updated: 15 Jul, 2025 07:04 PM

water dripping from above in the dilapidated school building in sirohi

केंद्र एवं राज्य की सरकार नीत नई योजनाएं निकालकर शिक्षा के नाम हमेशा वाह-वाही लूटकर घर-घर अलख जगाकर सरकारी विधालयों में सुविधाओं का दावा करते हैं, लेकिन आज भी कई सरकारी विधालय में सुविधाओं का टोटा होने के कारण नामांकन घट रहा हैं। असुविधाओं की भरमार...

सिरोही । केंद्र एवं राज्य की सरकार नीत नई योजनाएं निकालकर शिक्षा के नाम हमेशा वाह-वाही लूटकर घर-घर अलख जगाकर सरकारी विधालयों में सुविधाओं का दावा करते हैं, लेकिन आज भी कई सरकारी विधालय में सुविधाओं का टोटा होने के कारण नामांकन घट रहा हैं। असुविधाओं की भरमार से संचालित एक ऐसे विधालय से आपको रु-बरु कराएंगे जो शायद आप कल्पना भी नहीं कर सकते। आपको बता दे की रेवदर विधानसभा के ग्राम पंचायत पीथापुरा के निमतलाई गांव में संचालित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में अव्यवस्थाओं का आलम है..हकीकत कुछ और ही नजर आई। 

पीथापुरा के निमतलाई गांव में संचालित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं हैं। विधालय का परिसर व बिल्डिंग जमीन लेवल से काफी नीचे होने के कारण बारिश के इन दिनों में पूरे गांव का गंदा पानी विद्यालय की परिसर में आता हैं। परिसर में आने के गंदा पानी स्कूल के में घूसने से पुरा परिसर जलमग्न हो जाता हैं। वहीं विधालय में दो कमरे टीनशेड के बने हुए हैं तथा वर्षो पुराने होने के कारण टीनशेड के पतरे जगह-जगह से फूट चुके एवं दिवार खंडहर हो गई हैं। साथ ही दो कमरो के छत हैं लेकिन वो भी काफी पुराने होने की वजह से उपर से छत प्लास्टर गिर रहा व छत के अंदर लगे लौहे के सरीये बाहर निकल गये हैं। जहां दो कमरे सही हैं वहीं एक में विधालय का कार्यालय चलता हैं एवं दूसरे कमरे में बारिश के दौरान सभी बच्चों एक साथ बिठाया जाता हैं। विधालय के अध्यापको की मजबूरी हैं की बारिश में भी बच्चों को बरामदे में या खुले आसमान के तले बिठाकर पढ़ाई करानी पड़ती हैं या मजबूरन छूट्टी कर बच्चों को घर भेजना पडता हैं। सबसे खास बात तो ये है की विद्यालय का भवन पूरी तरह से जर्जर अवस्था में होने के कारण आए दिन हादसे का डर बना रहता हैं। जिसके चलते बच्चों की जिदंगी व भविष्य दोनों ही दांव पर लगे हैं। 

 निमतलाई विधालय के प्रधानाध्यापक भूराराम ने बताया की  पिछले वर्ष करीब 108 बच्चों का नामांकन था, लेकिन बिल्डिंग के अभाव व असुविधाओं के कारण इस वर्ष का नामांकन घटकर 78 ही हैं। प्रधानाध्यापक ने कहा की विधालय में बारिश के दौरान गंदा पानी घुसने के कारण परिसर व कमरों में भी गंदगी हो जाती हैं, रसोई घर में पानी घुसने की वजह पोषाहार भी बनाना मुश्किल हैं तथा कमरों में पानी आने से राशन का सामान तथा विधालय संबधित कागजात भी पानी में भीगने से खराब हो रहें हैं। भूराराम ने बताया की वर्तमान में नये कमरे बनाने के विधालय के पास पर्याप्त जगह नहीं हैं, जिसके कारण खेल मैदान का भी अभाव हैं। साथ ही साथ प्रार्थना करने के लिए भी जगह कम पड़ रही हैं। इधर प्रधानाध्यापक का कहना है की विधालय के लिए भूमि उपलब्ध करवाने हेतु ग्राम पंचायत से लेकर संबधित विभाग व जनप्रतिनिधियों को भी कई बार मांग पत्र देकर अवगत करवाया व आंवटन के लिए फाईल भी लगाई लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। इधर सरकार स्वच्छता अभियान पर जोर दे रही है। लेकिन निमतलाई के राजकीय विधालय के बाहर गंदगी व कीचड का आलम स्वच्छता पर कई सवाल खड़े करती हैं। मुख्य गेट सहित विधालय के चारों तरफ फैली गंदगी में बच्चों का चलना ही.ना केवल मुश्किल हैं, बल्कि गंदगी के बीच बैठकर घंटो तक पढाई करना स्वास्थ्य के लिए घातक बन रहा है। वहीं विद्यालय परिसर में बना शौचालय भी जर्जर एवं खंडहर होने के कारण अनुपयोगी साबित हो रहा हैं, जो बालिकाओं को गंभीर समस्याओ का सामना करना पड़ रहा हैं। इधर इस मामले के संबंध में सांसद लुंबाराम चौधरी व रेवदर उपखंड अधिकारी से मोबाइल फोन पर बातचीत करना चाहा मगर उन्होंने कोई जबाब नहीं दिया।

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