Edited By Anil Jangid, Updated: 15 Feb, 2026 04:05 PM

सिरोही। सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान पत्रकारिता से संबंधित एक संवेदनशील एवं जनहित से जुड़े विषय पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भारतीय रेल द्वारा पत्रकारों को दी जाने वाली यात्रा रियायतों को लेकर सरकार से तत्काल पुन: बहाल करने...
सिरोही। सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान पत्रकारिता से संबंधित एक संवेदनशील एवं जनहित से जुड़े विषय पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भारतीय रेल द्वारा पत्रकारों को दी जाने वाली यात्रा रियायतों को लेकर सरकार से तत्काल पुन: बहाल करने की मांग की।
सांसद डांगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय रेल द्वारा पत्रकारों की यात्रा रियायतें अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई थीं, जो उस समय की परिस्थितियों के अनुसार एक व्यावहारिक निर्णय था। लेकिन अब जब देश में सामान्य स्थिति बहाल हो गई है और अन्य श्रेणियों के लिए रियायतें फिर से लागू हो गई हैं, तब भी पत्रकारों के लिए यह सुविधा बहाल नहीं की गई। यह स्थिति खेदजनक है।
सांसद ने कहा कि पत्रकार केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देश के दूरदराज और संवेदनशील इलाकों में जाकर नागरिकों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आपदाओं और सामाजिक असमानताओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। इस प्रक्रिया में कई बार उन्हें जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के साथ कार्य करना पड़ता है। ऐसे में पत्रकारों को भारतीय रेल द्वारा दी जाने वाली यात्रा रियायतें कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में एक आवश्यक सुविधा थीं।
सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकारों को यात्रा रियायतों से वंचित रखना उनकी कार्यक्षमता को सीमित करता है, और यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। विशेष रूप से छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार, ग्रामीण और क्षेत्रीय मीडिया के संवाददाता इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। लोकतंत्र तभी सशक्त और उत्तरदायी रहेगा जब उसकी आवाज़ निर्बाध, स्वतंत्र और निर्भीक होगी।
सांसद डांगी ने सरकार से मांग की है कि कोविड-19 महामारी से पूर्व पत्रकारों को प्रदान की जा रही सभी यात्रा रियायतों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। इसके साथ ही, मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और स्थायी नीति बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनके अधिकारों और सुविधाओं की अनावश्यक समाप्ति न हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस नीति का लाभ केवल सक्रिय और वास्तविक पत्रकारों तक पहुंचे, और वे इसे सरल प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त कर सकें।