Edited By Anil Jangid, Updated: 24 Jan, 2026 04:33 PM

सीकर. राजस्थान की धरती हमेशा से ही प्रतिभाओं की जननी रही है, जिसके चलते यहां के निवासियों ने समय-समय पर अपनी बुद्धिमत्ता का लोहा मनवाया है. इसी कड़ी में सीकर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति...
सीकर. राजस्थान की धरती हमेशा से ही प्रतिभाओं की जननी रही है, जिसके चलते यहां के निवासियों ने समय-समय पर अपनी बुद्धिमत्ता का लोहा मनवाया है. इसी कड़ी में सीकर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति को हैरान करने वाली है। यहाँ पर 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले रूद्राक्ष बलारा नाम के एक 13 वर्षीय छात्र ने अपनी रचनात्मकता और ‘जुगाड़’ तकनीक के बेजोड़ संगम से एक ऐसी इलेक्ट्रिक कार बनाई है जो बिल्कुल असली कॉमर्शियल गाड़ी की तरह सड़कों पर दौड़ती भरती है. इस नन्हे वैज्ञानिक की इस अनोखी उपलब्धि को देखकर न केवल सीकरवासी, बल्कि जो भी इसके बारे में सुन रहा है, वह दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर है.
रूद्राक्ष द्वारा बनाई गई यह ईवी कार तकनीकी रूप से काफी सक्षम है. यह कार एक बार फुल चार्ज होने के बाद करीब 30 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है. वहीं, अगर इसकी स्पीड की बात की जाए, तो वो 25 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो स्थानीय स्तर पर आवागमन के लिए पर्याप्त है. इस पूरी कार को धरातल पर उतारने में रूद्राक्ष को लगभग चार महीने का कठिन परिश्रम करना पड़ा और इसमें कुल लागत करीब 32 हजार रुपये आई. सबसे दिलचस्प बात यह है कि रूद्राक्ष इस कार का उपयोग केवल खिलौने के रूप में नहीं करता, बल्कि वह घर के दैनिक कार्यों जैसे बाजार से दूध और ताजी सब्जियां लाने के लिए इस गाड़ी को खुद ही चलाकर ले जाता है.
रूद्राक्ष ने इस कार को किसी लग्जरी गाड़ी की तरह फीचर्स से लैस किया है. इसमें रात के समय सफर करने के लिए हेडलाइट्स, सुरक्षा के लिए हॉर्न, और गाड़ी की रफ्तार पर नजर रखने के लिए एक डिजिटल स्पीड मीटर भी लगाया गया है. इसके अलावा, इसमें एक एडवांस बैटरी चार्जिंग सिस्टम और आधुनिक तकनीक की सजावटी लाइट्स भी मौजूद हैं. रूद्राक्ष की दूरदर्शिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने इस कार में एक साथ आठ मोबाइल चार्जिंग पॉइंट लगाए हैं, ताकि सफर के दौरान फोन की बैटरी खत्म होने की चिंता न रहे. इस पूरी कार को चार्ज होने में मात्र 4 घंटे का समय लगता है और रूद्राक्ष लगातार इसे और बेहतर बनाने के लिए इसमें नए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपडेट्स भी करता रहता है.
रूद्राक्ष के मन में इस कार को बनाने का विचार तब आया जब पिछले साल वह जयपुर अपने मामा के घर गया था और वहां उसने एक इलेक्ट्रिक रेस कार देखी थी. उस रेस कार ने उसे इतना प्रभावित किया कि उसने ठान लिया कि वह खुद की ईवी कार बनाएगा. इस लक्ष्य को पाने के लिए उसने घंटों यूट्यूब और सोशल मीडिया पर तकनीकी वीडियो देखे, सर्किट को समझा और योजना तैयार की. जब बजट की समस्या सामने आई, तो रूद्राक्ष ने अपने जन्मदिन पर माता-पिता से महंगे खिलौनों या कपड़ों की मांग करने के बजाय कार के लिए जरूरी मशीनरी और इलेक्ट्रिकल पार्ट्स को बतौर ‘गिफ्ट’ मांगा. बेटे के जुनून को देखते हुए पिता डॉ. राजकुमार बलारा और माँ शकुन्तला ढाका ने उसे सामान उपलब्ध कराया और परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है. रूद्राक्ष अब तक 15 से अधिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बना चुके हैं और उनकी यह सफलता आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है.