Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 06 Jan, 2026 07:07 PM

सवाई माधोपुर । जिले के चौथ का बरवाड़ा कस्बे में स्थित चौथ माता मंदिर में संकट चतुर्थी के अवसर पर आयोजित चार दिवसीय वार्षिक मेले का आज मुख्य दिन रहा।
सवाई माधोपुर । जिले के चौथ का बरवाड़ा कस्बे में स्थित चौथ माता मंदिर में संकट चतुर्थी के अवसर पर आयोजित चार दिवसीय वार्षिक मेले का आज मुख्य दिन रहा। सुबह से ही माता के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज़ से आए लाखों भक्तों ने चौथ माता के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
मेले में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाएं पूरी तरह चाक-चौबंद रहीं। मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए, वहीं पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई।
भव्य साज-सज्जा और विशेष झांकियां
संकट चतुर्थी पर चौथ माता के दरबार को फूल बंगला झांकी से सजाया गया। माता का आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसमें मंदिर ट्रस्ट द्वारा पहनाया गया ढाई किलो वजनी स्वर्ण मुकुट और नौ लाखा हार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सुबह पांच बजे मंगला आरती के बाद छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। मंदिर परिसर को रोशनी और सजावट से जगमगाया गया।
कड़ाके की ठंड भी नहीं डिगा सकी आस्था
घने कोहरे और हाड़ कंपाने वाली ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। महिलाएं संकट चतुर्थी का व्रत रखकर चंद्रमा को अर्घ्य देती नज़र आईं। सर्दी की परवाह किए बिना भक्त माता के जयकारों के साथ लगातार मंदिर की ओर बढ़ते रहे। जगह-जगह भंडारों की व्यवस्था की गई, जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन उपलब्ध कराया गया।
प्रशासनिक इंतज़ाम
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मोबाइल शौचालय, रैन बसेरे और अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती की गई। बीमार यात्रियों के उपचार के लिए चिकित्सकों की टीम, 108 एंबुलेंस और 24 घंटे की आपातकालीन सेवाएं मौजूद रहीं। सुरक्षा की दृष्टि से 1200 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय सिंह ने बताया कि मेला क्षेत्र में तीन अतिरिक्त एसपी, आठ डिप्टी एसपी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी तैनात हैं। श्रद्धालुओं की सहायता के लिए जगह-जगह हेल्प डेस्क लगाए गए हैं, वहीं तालाबों के पास गोताखोरों की भी व्यवस्था की गई है। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए सादा वर्दी में पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए हैं।
इतिहास और आस्था से जुड़ी मान्यताएं
चौथ माता मंदिर को लेकर क्षेत्र में कई किवदंतियां प्रचलित हैं। मंदिर के पुजारी शंकर लाल सैनी के अनुसार, मंदिर की स्थापना 1451 में तत्कालीन शासक भीमसिंह द्वारा कराई गई थी। बाद में 1463 में मंदिर मार्ग पर छतरी और पहाड़ी की तलहटी में तालाब का निर्माण हुआ। सोलहवीं शताब्दी में यह क्षेत्र राठौड़ वंश के अधीन आया, जिनके शासकों की भी माता में गहरी आस्था थी।
मान्यता है कि राठौड़ शासक तेजसिंह राठौड़ ने 1671 में मुख्य मंदिर के दक्षिण भाग में तिबारा बनवाया था। हाड़ौती क्षेत्र में आज भी किसी शुभ कार्य से पहले चौथ माता को निमंत्रण देने की परंपरा है। बुंदी राजघराने के समय से चौथ माता को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता रहा है। कहा जाता है कि महिलाओं द्वारा रखे जाने वाले करवा चौथ व्रत की परंपरा भी यहीं से जुड़ी है।
मेले की रौनक चरम पर
हाड़ौती क्षेत्र के कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ सहित आसपास के इलाकों और प्रदेश के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे हैं। मेला परिसर में तरह-तरह की दुकानें सजी हैं और चौथ माता का वार्षिक मेला पूरी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ अपने पूरे परवान पर है।